Corona fighters : हिम्मत व हौसले से घर में ही रहकर हरा दिया कोरोना संक्रमण को

हिम्मत व हौसला हो और सही समय पर इलाज मिल जाए तो कोरोना को घर में रहकर हराया जा सकता है। इसे साबित कर दिखाया है इंदिरा नगर निवासी सूरज शुक्ला ने। उन्होंने समय से जांच कराई। रिपोर्ट पाजिटिव आने पर होम आइसोलेट हो गए। डरे न घबराए।

Rahul SrivastavaSun, 30 May 2021 05:10 PM (IST)
इंदिरा नगर निवासी सूरज शुक्ला। फाइल फोटो

गोरखपुर, जेएनएन : हिम्मत व हौसला हो और सही समय पर इलाज मिल जाए तो कोरोना को घर में रहकर हराया जा सकता है। इसे साबित कर दिखाया है इंदिरा नगर निवासी सूरज शुक्ला ने। उन्होंने समय से जांच कराई। रिपोर्ट पाजिटिव आने पर होम आइसोलेट हो गए। डाक्टर की सलाह पर दवाएं लेते रहे और कोरोना को घर में रहकर हरा दिया।

अधिक था कोरोना संक्रमण का प्रभाव

सूरज ने बताया कि उनपर कोरोना का प्रभाव अधिक था। छह दिन तेज बुखार रहा। डाक्टर की सलाह पर नियमित दवाएं लेते रहे। भाप व गरारा करते रहे। रिश्ते में बड़े भाई राहुल नाथ तिवारी उनका मनोबल बढ़ाते रहे। छह दिन बाद तबीयत में सुधार शुरू हुआ। 15 दिन बाद उन्होंने दोबारा जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। जानने वाले कोरोना पीड़‍ितों की मोबाइल फोन के जरिये मदद कर रहे हैं। उन्हें सतर्कता, भाप व गरारा करने की सलाह दे रहे हैं।

90 साल उम्र, हाजी सुभानउल्लाह ने घर में रहकर हरा दिया कोरोना को

रुस्तमपुर के चिलमापुर निवासी हाजी सुभानउल्लाह ने 90 साल की उम्र में घर पर रहकर कोरोना को हरा दिया। बुखार से बदन तपने लगा और खांसी आने लगी तो स्वजन परेशान हो गए, लेकिन हाजी सुभानउल्लाह ने सभी को धैर्य रखने को कहा। बेटे जहूरुल्लाह और परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी कोरोना की चपेट में आए तो उनका संबल वह बने। पांचों वक्त की नमाज अदा करते हुए विश्व को कोरोना मुक्त होने की दुआ करते रहे। इच्‍छाशक्ति मजबूत रखते हुए एलोपैथ के साथ ही आयुर्वेद की दवा का सेवन किया। 10-12 दिनों में सभी की रिपोर्ट निगेटिव आ गई।

रिपोर्ट पाजिटिव आने पर घबरा गया पूरा परिवार

हाजी सुभानउल्लाह के बेटे और गोलघर उद्योग व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष जहूरुल्लाह ने बताया कि 26 अप्रैल को अब्बा को बुखार आया तो दवा शुरू कर दी। 28 अप्रैल को जांच में कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आयी तो पूरा परिवार घबरा गया। उस समय कोरोना अपने चरम पर था। अस्पतालों में भी जगह नहीं मिल रही थी, फिर भी डाक्टरों से बेड के लिए बात कर ली। इस बीच खुद मैं और अन्य सदस्यों की रिपोर्ट भी पाजिटिव आ गई। मुश्किल घड़ी में अब्बा सभी का आत्मविश्वास बढ़ाते रहे। भाप, गलाला के साथ ही काढ़ा और अन्य आयुर्वेदिक दवाओं के साथ डाक्टरों की बताई एलोपैथिक दवाओं का सेवन किया। बीमारी के समय में भी दूसरे कोरोना संक्रमितों से बात कर उनकी हौसला अफजाई करते रहे।

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