कहीं संतान प्राप्ति में बाधक तो नहीं बन रहा कोरोना, बीआरडी में होगा शोध Gorakhpur News

बाबा राघवदास मेडिकल कालेज भवन का फाइल फोटो।

माइक्रोबायोलाजी विभाग के अध्यक्ष डा. अमरेश सिंह ने बताया कि शोध की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। ऐसी महिलाएं जिनकी शादी दो साल के अंदर हुई है और पिछले दिनों कोरोना संक्रमित हो गई थीं। उनमें से छह ने गर्भ न ठहरने की समस्या बताई है।

Satish chand shuklaFri, 26 Feb 2021 08:50 AM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। कोरोना संक्रमित शादीशुदा युवतियों की संतान प्राप्ति की चाह में कोरोना कहीं बाधक तो नहीं बन रहा, इसपर बाबा राघव दास मेडिकल कालेज का माइक्रोबायोलाजी विभाग शोध करेगा। अब तक छह से अधिक महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना से इलाज कराने मेडिकल कालेज पहुंच चुकी हैं, जो जुलाई से अगस्त के बीच संक्रमित हुई थीं। इसके बाद कालेज प्रशासन ने इस पर शोध करने का निर्णय लिया है। शोध के लिए कोरोना संक्रमित युवतियों की खोज शुरू हो गई है।

इसलिए लिया गया शोध का निर्णय

माइक्रोबायोलाजी विभाग के अध्यक्ष डा. अमरेश सिंह ने बताया कि शोध की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। ऐसी महिलाएं जिनकी शादी दो साल के अंदर हुई है और पिछले दिनों कोरोना संक्रमित हो गई थीं। उनमें से छह ने गर्भ न ठहरने की समस्या को लेकर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग से संपर्क किया है। इस समस्या का कारण कहीं कोरोना तो नहीं है, इसका पता लगाने के लिए शोध का निर्णय लिया गया है। शोध में महिलाओं की दिनचर्या, खान-पान व रहन-सहन को भी शामिल किया जाएगा।

7400 लोगों को टीका लगाने का लक्ष्‍य

वहीं पहली व दूसरी डोज का टीकाकरण शुरू हो गया है। 78 बूथों पर 7400 लोगों को कोरोना का टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक जारी सूची से बचे हुए स्वास्थ्य कर्मियों व फ्रंटलाइन वर्करों के लिए मापअप राउंड व 28 व 29 जनवरी को पहली डोज ले चुके लोगों के लिए दूसरी डोज का टीकाकरण आयोजित किया गया है। सभी बूथों पर उत्सव व उल्लास का माहौल है। लोग बारी-बारी से टीकाकरण करा रहे हैं।

टीकाकरण सुबह 10 बजे शुरू हो गया है। हर बूथ के गेट पर सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। टीका लगवाने पहुंच रहे लोगों का नाम वे सूची से मिला रहे हैँ। परिचय पत्र देखने के बाद अंदर प्रवेश दे रहे हैं। वहां सत्यापन हो रहा है। इसके बाद लोगों को वेटिंग रूम में बैठाया जा रहा है। बारी-बारी से वे टीकाकरण कक्ष में जा रहे हैं और टीका लगवा रहे हैं। टीका लगवाने के बाद उन्हें आब्जर्वेशन कक्ष में भेजा रहा है। वहां 30 मिनट विशेषज्ञों की निगरानी में रहने के बाद ही उन्हें छोड़ा जा रहा है।

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