सीएम योगी आदित्‍यनाथ गोरखपुर के पटरी व्यापारियों को देंगे स्थायी ठौर, जानें-कितनी जगह में बनीं हैं दुकानें

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की फाइल फोटो, जेएनएन।

पहले चरण में नया सवेरा रामगढ़ ताल तारामंडल नुमाइश ग्राउंड के पास 38.44 लाख रुपये की लागत से पटरी व्यापारियों के लिए वेंडिंग जोन बनाया गया है। यहां 35 पथ विक्रेताओं को व्यवस्थित व्यापार करने की जगह मिल रही है।

Satish chand shuklaWed, 03 Mar 2021 06:52 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। शहर के पटरी व्यापारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ से बड़ी सौगात मिलने जा रही है। 470 पटरी व्यवसायियों को शहर के तीन स्थानों पर दो वर्ग मीटर की जगह दी जा रही है। नगर निगम की तरफ से शेड बनवाए गए हैं। मुख्यमंत्री चार मार्च को इसका उद्घाटन करेंगे।

तीन स्थानों पर मिलेगी 470 पटरी व्यापारियों को जगह

सीएम योगी के मार्गदर्शन में नगर निगम ने दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत वेंडिंग जोन का विकास किया है। पहले चरण में नया सवेरा रामगढ़ ताल, तारामंडल नुमाइश ग्राउंड के पास 38.44 लाख रुपये की लागत से पटरी व्यापारियों के लिए वेंडिंग जोन बनाया गया है। यहां 35 पथ विक्रेताओं को व्यवस्थित व्यापार करने की जगह मिल रही है। हरिओम नगर व रुस्तमपुर ढाले के पास 155 पथ विक्रेताओं के लिए 145.01 लाख रुपये की लागत से वेंडिंग जोन विकसित किया गया है। जबकि सर्वाधिक 280 पथ विक्रेताओं के लिए 239.37 लाख रुपये की लागत से महेवा टीपीनगर, पुलिस चौकी के पीछे वेंडिंग जोन बनाया गया है। तीनों स्थान पर वेंडिंग जोन बनाने पर 4.20 करोड़ रुपये की लागत आई है।

नुमाइश ग्राउंड में होगी सभा

मुख्यमंत्री रामगढ़ ताल के सामने गोरखपुर विकास प्राधिकरण की ओर से बनवाए गए नुमाइश ग्राउंड का उद्घाटन व इसी ग्राउंड में संस्कृति विभाग की ओर से स्थापित ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की आदमकद प्रतिमा का भी अनावरण करेंगे। नुमाइश ग्राउंड बनाने की पहल भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ही है। इस मैदान से सार्वजनिक सभाओं व अन्य कार्यक्रमों के लिए एक व्यवस्थित स्थल उपलब्ध हुआ है। यहां दिव्यांगजन की सुविधा के लिए रैंप भी बनाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ स्वतंत्रता सेनानी, सांसद रहने के साथ गोरखपुर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक क्रांति के अग्रदूत के रूप में जाने जाते हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में भी उनका महती योगदान रहा है। नुमाइश ग्राउंड में उनकी आदमकद प्रतिमा उनके व्यक्तित्व व कृतित्व का स्मरण कराते हुए लोगों को राष्ट्र व समाजहित में योगदान को प्रेरित करेगी।

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