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बाजार में नहीं दिखीं चीनी राखियां, देसी राखियों की धूम Gorakhpur News

गोरखपुर, जेएनएन। इस साल के रक्षाबंधन पर बहनों ने भाइयों की कलाई सजाने के लिए देशी राखियों को तवज्जो दी। व्यापारियों ने भी चीन की राखियां नहीं मंगाई थी। जिनके पास पिछले साल का माल था, उसे  बेचने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि पर्व से ठीक पहले के दो दिन साप्ताहिक प्रतिबन्ध होने के कारण राखी का व्यापार पिछले साल की तुलना में प्रभावित हुआ।

बिकीं सिर्फ 65 फीसद राखियां

शहर के पाण्डेयहाता के व्यापारी राखी का थोक कारोबार करते हैं। यहां करीब 15 से 20 दुकानें हैं। लेकिन यह क्षेत्र जिस थानाक्षेत्र में आता है, वहां कई दिनों से लॉक डाउन था, जिसके कारण मंगाया गया पूरा माल बिक नहीं सका। फुटकर व्यापारी भी माल नहीं ले जा सके। व्यापारी इस बार माल खरीदने नहीं गए थे। फोन पर ऑर्डर देकर दिल्ली, कोलकाता आदि स्थानों से माल मंगाया था। थोक व्यापारी ओमप्रकाश पटवा के अनुसार अधिकतर समय लॉकडाउन था। शासन के कहने के बावजूद गोरखपुर में रविवार को भी दुकान खोलने की अनुमति नहीं मिली। मजबूरी में घर से कुछ लोगों को माल दिया गया। करीब 65 फीसद माल ही निकल सका। इस बार चीन की राखियां नहीं मंगाई गई थी। सबकुछ देशी था। 

पिछले साल की तुलना में आधा रहा बाजार 

पिछले साल तक राखी का व्यापार काफी अच्छा रहता था। व्यापारियों की मानें तो चीन की राखियां भी खूब आती थीं। जिले में करीब चार करोड़ का कारोबार होता था लेकिन इस बार कारोबार आधा ही रहा। चीन के सामान के बहिष्कार के बीच लोगों ने पहले से राखी की तैयारी कर ली थी। कई घरों में महिलाओं ने स्वयं ही राखी बना ली। कुछ महिला समूहों ने भी हजारों राखियां बनाईं। लॉकडाउन के कारण दुकानें बंद होने के कारण घरों में राखी बनाने के कारण भी बाजार प्रभावित रहा। बिछिया में बृजेश साहनी राखी बनाने की सामग्री मंगाकर राखी तैयार कराते हैं। इस बार उनके यहां से कई घरों में लोग मोती, स्वास्तिक,गणेश चिन्ह, ओम चिन्ह, धागा आदि ले गए। 

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