भगवान बुद्ध के धातु अवशेष लेकर फर्रुखाबाद रवाना हुए श्रीलंका के बौद्ध धर्मगुरु

श्रीलंका से आए भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष को बौद्व धर्मगुरु कड़ी सुरक्षा में कुशीनगर से गोरखपुर एयरपाेर्ट लेकर पहुंचे। एसपी सिटी की अगुवाई में 20 सदस्यीय शिष्टमंडल का स्वागत किया गया। यहां से धर्मगुरु एयर इंडिया की फ्लाइट से धातु अवशेष को लेकर लखनऊ रवाना हुए।

Pradeep SrivastavaSat, 23 Oct 2021 09:39 AM (IST)
श्रीलंका से लाए गए भगवान बुद्ध के धातु अवशेष को लेकर बौद्ध धर्मगुरु रवाना हो गए हैं। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। श्रीलंका से आए भगवान बुद्ध के धातु अवशेष (अस्थि अवशेष) को बौद्व धर्मगुरु कड़ी सुरक्षा में कुशीनगर से गोरखपुर एयरपाेर्ट लेकर पहुंचे। एसपी सिटी की अगुवाई में 20 सदस्यीय शिष्टमंडल का स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर 30 मिनट रुकने के बाद बौद्ध धर्मगुरु एयर इंडिया की फ्लाइट से धातु अवशेष को लेकर लखनऊ रवाना हुए, जहां से फर्रुखाबाद के संकसा ले जाया जाएगा।

धातु अवशेष को मिला है राष्ट्राध्यक्ष प्रोटोकाल, तीन दिन गोरखपुर में रहा शिष्टमंडल

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में बौद्ध धर्मगुरु धातु अवशेष (अस्थि अवशेष) को श्रीलंका से लेकर कुशीनगर आए थे। जिसे पहले एयरपोर्ट पर रखा गया, फिर वहां से महापरिनिर्वाण बुद्ध विहार ले जाया गया। वहां धातु अवशेष की विशेष पूजा की गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यक्रम संपन्न होने के बाद श्रीलंका से आया शिष्टमंडल धातु अवशेष को लेकर गोरखपुर चला आया।

तीन द‍िन गोरखपुर में रहा श‍िष्‍टमंडल

यहां तीन दिन तक होटल रेडीसन ब्लू में रहा। इसके बाद एसपी सिटी सोनम कुमार कड़ी सुरक्षा में बौद्ध धर्मगुरु के साथ धातु अवशेष को लेकर गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचे। जहां एयरपोर्ट निदेशक प्रभाकर बाजपेई ने स्वागत किया।एसपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि भगवान बुद्ध के धातु अवशेष को राष्ट्राध्यक्ष प्रोटोकाल मिला है। जिसको लेकर एयरपोर्ट के अंदर और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

विमान में धातु अवशेष के लिए अलग सीट

धातु अवशेष का बौद्ध धर्म में विशेष महत्व है। मूर्ति पूजा से पहले इसी की पूजा की जाती थी। जहां पर इसे रखा जाता है, उसे धार्मिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। भारत सरकार में धातु अवशेष को राष्ट्राध्यक्ष का प्रोटोकाल मिला है। एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद प्रोटोकाल का पालन करते हुए धातु अवशेष को पहले कुर्सी पर रखा गया। उसके बाद बौद्ध धर्मगुरु और शिष्टमंडल के सदस्य बैठे। विमान में भी धातु अवशेष को पहले सबसे आगे की सीट पर रखा गया, उसके बाद शिष्टमंडल के लोग बैठे।

होटल में रहा सख्त पहरा

धातु अवशेष की सुरक्षा को लेकर होटल रेडिसन ब्लू में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।कमरे के बाहर और परिसर में सिपाही के साथ ही एलआइयू की टीम मुस्तैद रही।इस दौरान हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी गई।

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