कोरोना संक्रमण में चमकीं ये बहादुर बेटियांं, मास्क बेचकर की तीन लाख रुपये से अधिक की कमाई

डुमरी खास गांव में मास्क तैयार करती दिव्यांग महिलाएं।
Publish Date:Thu, 22 Oct 2020 12:21 PM (IST) Author: Satish Shukla

गोरखपुर, जेएनएन। सरदारनगर विकास खंड का डुमरी खास गांव दिव्यांग बेटियों के हुनर का ठिकाना बन रहा है। यहां न सिर्फ दिव्यांग बेटियों के हुनर को मुकाम मिला, बल्कि संक्रमण से बचाव में इन बेटियों ने अहम भूमिका निभाई। मास्क बेचकर इन बेटियों ने करीब तीन लाख रुपये कमाए हैं। अपने इस कार्य के जरिये वह क्षेत्र की तमाम महिलाओं को रोजगार की राह दिखा रही हैं।

परिवार पर महसूस कर रहीं थी बोझ

इन दिव्यांग बेटियों में देवीपुर की 35 वर्षीया शकुंतला, इब्राहिमपुर की 22 वर्षीया किरन, बिलारी की 23 वर्षीया अनु, 28 वर्षीया अनीता आदि शामिल हैं। शकुंतला बताती हैं कि मार्च के प्रथम सप्ताह से ही कोरोना का असर दिखने लगा था। अप्रैल प्रथम सप्ताह से घर के जो लोग बाहर कमाने गए हुए थे, उन लोगों की नौकरियां छिनने लगीं। वह कहती हैं कि पांव से दिव्यांग होने के कारण वह परिवार पर बोझ तो थी हीं, लोगों की निगाहों में खटकने लगी थीं।

संस्‍था के सहयोग से सीखा मास्‍क बनाने का तरीका

ऐसे में पता चला कि कुछ महिलाएं डुमरी खास में एक संस्था के सहयोग से मास्क तैयार करने का काम सीख रहीं हैं। इस कार्य में दो लाभ दिखे। पहला तो मास्क के प्रयोग से लोग संक्रमण के खतरे को टाल सकते हैं। दूसरा यह कि इस आपदा को वह एक अवसर के रूप में ले सकती थीं। ऐसे में शकुंतला के साथ में क्षेत्र की 13 दिव्यांग बेटियों ने मास्क बनाने का प्रशिक्षण लिया। लोगों को मास्क का प्रयोग करने के लिए जागरूक किया। इतना ही नहीं समय-समय पर इन्होंने अपने मास्क को अपडेट भी किया। नतीजा यह रहा कि प्लेन मास्क, इलास्टिक प्लेन मास्क, नान वूवेन मास्क, डिजाइनर मास्क आदि तैयार किया। अब वह फेसशील्ड भी बना रही हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए मास्क को इन्होंने अस्पताल, मेडिकल स्टोर, दुकानों पर बिक्री की।

दिल्ली से मिला है आर्डर

संस्था के सदस्य आनंद पाण्डेय बताते हैं कि उन्हें हाल में दिल्ली से भी एक आर्डर मिला है। इसके लिए 100 सैंपल तैयार कराए जा रहे हैं। वहां सैंपल चयनित हुआ तो दिल्ली के बाजार में भी यहां का मास्क दिखेगा।

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