पूर्वांचल के बाग में अमेरिकन आम, दिल्ली से जम्मू तक है इस आम की मांग

इंडो-इजराइल परियोजना के तहत यूपी के बस्ती के बंजरिया में स्थापित फल उत्कृष्टता केंद्र पूर्वांचल के आम के बागों को समृद्ध कर रहा है। सिर्फ फल उत्कृष्टता केंद्र से प्रतिवर्ष 40 हजार आम के पौधाें का किसान रोपण कर रहे हैं।

Pradeep SrivastavaThu, 22 Jul 2021 11:02 AM (IST)
इंडो-इजराइल परियोजना के तहत यूपी के बस्ती में आम के पौधे लगाए जा रहे हैं। - प्रतीकात्मक तस्वीर

गोरखपुर, जितेंद्र पाण्डेय। गोरखपुर-बस्ती मंडल का यह क्षेत्र आम के बड़े बेल्ट के रूप में विकसित हो रहा है। पहली बार बस्ती के 500 पौधों की मांग जम्मू उद्यान विभाग से हुई है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान दिल्ली को 700 पौधे भेजे जा चुके हैं। दिल्ली क्षेत्र के किसान इन पौधों को रोप भी चुके हैं। 500 पौधे पुणे भेजे गए हैं। संयुक्त निदेशक उद्यान डा. दुर्गेश सिंह का कहना है कि आने वाले वर्षों में उत्तर-दक्षिण के बागों में पूरब के भी आम दिखेंगे।

आम के खास क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा पूर्वांचल

इंडो-इजराइल परियोजना के तहत बस्ती के बंजरिया में स्थापित फल उत्कृष्टता केंद्र पूर्वांचल के आम के बागों को समृद्ध कर रहा है। सिर्फ फल उत्कृष्टता केंद्र से प्रतिवर्ष 40 हजार आम के पौधाें का किसान रोपण कर रहे हैं। इसके अलावा उद्यान विभाग व निजी नर्सरियों के सहयोग से गोरखपुर बस्ती मंडल में प्रति वर्ष लाखों पौधे रोपे जा रहा है।

उप निदेशक उद्यान डा.डीके वर्मा के मुताबिक गोरखपुर-बस्ती मंडल में इस समय करीब 40 हेक्टेयर में आम का बाग है और प्रतिवर्ष करीब 10 लाख टन आम का उत्पादन होता है। संयुक्त निदेशक उद्यान बस्ती डा.दुर्गेश सिंह का कहना आम के पौधों व बाग को लेकर यह क्षेत्र कितना समृद्ध हुआ है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब जम्मू, दिल्ली व पुणे यहां से आम के पौधे जाने लगे हैं।

अब अपने बाग में अमेरिकन आम

दशहरी, गौरजीत, कपूरी, चौसा, लंगड़ा के स्वाद व खुश्बू को लेकर गोरखपुर-बस्ती मंडल के बाग जाने जाते रहे हैं, लेकिन अब इस बाग में अमेरिका का टामी एटकिन भी मौजूद है। इसके जरिये मधुमेह के रोगी भी आम का स्वाद ले सकेंगे। उसकी वजह है कि इस आम में शुगर की मात्रा बेहद कम है। आम्रपाली व गौरजीत के लिए मशहूर बंजरिया फल उत्कृष्टता केंद्र में इसके साथ ही आकर्षक पीले आम के फल देने वाला मल्लिका, आकर्षक लाल फल देने वाला पूसा अरुणिमा, सुनहरा पीला फल देने वाला पूसा सूर्या (एल्डन), बाहर से लाल व अंदर से नारंगी फल देने वाला पूसा प्रतिभा, आकर्षक लाल फल देने वाला पूसा श्रेष्ठ के करीब 10 हजार पौधे भी तैयार किये गए हैं।

बस्ती के अर्दमा, सिद्धार्थनगर के शिवपतिनगर, ढुसरी, डुमरियागंज, गोरखपुर के अलेनाबाद, बड़हलगंज क्षेत्रों में कुछ किसान इसका पौधा भी लगा चुके हैं। ऐसे में अब यहां के बाग एक दो नहीं, बल्कि दर्जनों प्रजातियों के आम का सेवन लोगों को कराएंगे।

25 प्रजातियों की विशेष नर्सरी है बेलीपार

कृषि विज्ञान केंद्र बेलीपार आम के सेंटर फार एक्सीलेंस के लिए चयनित है। टामी एटकिन, पूषा अरुणिमा, पूषा पीतांबरी, पूषा अंबिका सहित 25 प्रजाति के आम की नर्सरी के रूप से इसे विकसित किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र बेलीपार के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.एसके तोमर का कहना है यहां की नर्सरी में तैयार पौधों को गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिलों के अलावा 24 जिलों में वितरित किया जाएगा। ताकि यह क्षेत्र आम के लिए अपनी खास पहचान बनाएं।

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