अनलॉक के बाद से हवाओं फिर घुलने लगा जहर, सांस लेना हुआ मुश्किल Gorakhpur News

अनलॉक के बाद गोरखपुर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है।
Publish Date:Tue, 29 Sep 2020 10:30 AM (IST) Author: Pradeep Srivastava

गोरखपुर, जेएनएन। लॉकडाउन के दौरान पहली बार यहां फेफड़ों को अच्छी श्रेणी की हवा मिली। लेकिन अनलॉक के बाद से हवाओं फिर जहर का घुलना शुरू हो गया है। यह स्थिति सेहत के लिए चिंताजनक है।

शहर में तीन स्थानों पर हवा के गुणवत्ता की मानीटरिंग होती है। इसमें गीडा(औद्योगिक), जलकल (व्यावसायिक) व मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आवासीय) पर वर्ष 2011 से हवा की गुणवत्ता आंकी जाती है। लॉकडाउन शुरू होने पूर्व व बाद की स्थिति पर नजर डालें तो इस बाद का अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या बदलाव आया है।

जानिए क्या है मानक

पीएम-10 (हवा में तैरने वाले 10 माइक्रान से छोटे कण जो नाक के बालों से भी रुकते नहीं बल्कि सांस के साथ सीधे फेफड़े तक पहुंच सकते हैं) इनकी मात्रा प्रति घन मीटर 60 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। सल्‍फर डाई आक्‍साइड की मात्रा 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और नाइट्रोजन की मात्रा 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स की छह श्रेणियां हैं। 0 से 50 अच्छी, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से अधिक अत्यंत चिंताजनक श्रेणी में आता है।

एक नजर आंकड़ों पर

पीएम 10 सल्फर डाई आक्‍साइड नाइट्रोजन डाई आक्‍साइड एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स

फरवरी 2020

आवासीय- 167.82, 2.85, 11.45, 145

व्‍यावसायिक-280.68, 8.56, 21.71, 231

औद्योगिक-329.83, 23.58, 39.14, 280

मई- 2020

आवासीय- 44.64, 1.47, 3.98, 45

व्‍यवसायिक-78.46, 2.55, 6.97, 78

औद्योगिक-132.24, 10.14, 18.40, 121

जुलाई- 2020

आवासीय-59.97, 1.14, 3.10, 60

व्‍यवसायिक-105.71, 3.10, 9.58, 104

औद्योगिक-189.97, 12.87, 22.55, 160

लॉकडाउन से सबक लेते हुए हमें उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र, वाहनों के प्रदूषण की रोकथाम, निर्माण कार्यों में गिट्टी-बालू आदि को ढंकने और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। अभी गोरखपुर में सामाजिक वानिकी को मिलाकर वन क्षेत्र करीब सात प्रतिशत तक है। इसे 33 प्रतिशत पर लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। - प्रो. गोविंद पांडेय, प्रधान अन्वेषक, परिवेशीय वायु गुणवत्ता अनुश्रवण कार्यक्रम

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