कोविड काल के बाद 15 से 35 साल की युवतियों व महिलाओं की बिगड़ रही कम उम्र सेहत, जानिए क्‍या है वजह

कोविड काल के बाद 15 से 35 वर्ष की महिलाओं में सेहत से संंबंधित कई तरह की समस्‍या आ रही है। अधिकतर किशोरियां युवतियां और महिलाएं पाली‌सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का ि‍शिकार हो रही हैं। जिसकी वजह से उनमें मोटापा और गर्भ न रुकने की समस्‍या आ रही है।

Navneet Prakash TripathiSun, 03 Oct 2021 01:35 PM (IST)
कोविड के प्रकोप से महिलाओं की बिगड़ रही कम उम्र सेहत।

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। 15 से 35 साल की किशोरियों, युवतियों और महिलाओं की सेहत बिगड़ रही है। अधिकतर पाली‌सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओडी) की शिकार हो रही हैं। काविड काल के बाद 15-20 फीसद महिलाओं में इस बीमारी के मामले बढे हैं। विशेषज्ञ इसकी वजह अनियमित जीवन शैली बता रहे हैं। इस सिंड्रोम से प्रभावित महिलाओं में कई तरह की दिक्‍कत सामने आ रही हैं।

बढ रहा है मोटापा, गर्भ न रुकनेक की आ रही समस्‍या

इस सिंड्रोम की वजह से इसकी वजह से मोटापा बढ़ रहा है। साथ ही वे अनियमित मासिक चक्र व गर्भ न रुकने की समस्या से परेशान हैं। मोटापे से परेशन अधिकतर महिलाएं जिम जाना शुरू कर दे रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने ऐसे मामले में जिम न जाने और डाक्टर को दिखाने की सलाह दी है। क्योंकि ज्यादातर युवतियों में ओवरी में सिस्ट (गांठ) हो जाती है, जो बिना इलाज के ठीक होना संभव नहीं है।

तली-भुनी चीजें खाने से भी आ रही समस्‍या

बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या 15-20 फीसद बढ़ी है। युवतियां भी इसकी शिकार हाे रही हैं। अनियमित जीवन शैली, ज्यादा तली-भुनी चीजें खाना, तनाव व देर रात तक जागना इसका कारण है। धूमपान व शराब के सेवन से भी यह बीमारी होती है, हालांकि अभी तक मेडिकल कालेज आई युवतियाें व महिलाओं ने किसी भी तरह के नशे के सेवन से इन्कार किया है।

समय से इलाज न कराने पर गंभीर हो सकती है समस्‍या

कई ने जिम व ब्यूटी पार्लर जाकर मोटापा ठीक करने की कोशिश की लेकिन उससे कोई राहत नहीं मिली। डाक्टरों ने उन्हें इस मामले में जिम व ब्यूटी पार्लर न जाकर अस्पताल जाने की सलाह दी है। क्योंकि समय से इलाज शुरू हो जाने पर बीमारी गंभीर रूप धारण नहीं करती। दवाओं से ठीक हो जाती है।

बीमारी बढने पर आपरेशन करना हो जाता है जरूरी

बीमारी बढ़ जाने पर आपरेशन जरूरी होता है। यह कैंसर का भी रूप ले सकती है। इस बीमारी में मासिक चक्र अनियमित हो जाते हैं। गर्भधारण में दिक्कतें आने लगती हैं। पेट दर्द, बालाें का झड़ना व त्वचा संबंधी दिक्कतें भी इस बीमारी के लक्षण हैं।

लक्षण आने पर डाक्‍टर से लें सलाह

बीआरडी मेडिकल कालेज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डा. वाणी आदित्य बताती हैं कि पीसीओडी में हार्मोंस असंतुलन के करण ओवरी में गांठ बन जाती है। इसकी वजह से मासिक चक्र अनियमित हो जाता है तथा गर्भधारण की क्षमता में कमी आने लगती है। ये लक्षण नजर आने पर तत्काल डाक्टर को दिखाना चाहिए। शुरुआत में यह बीमारी दवाओं से ठीक हो सकती है।

 

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