Coronavirus in Gorakhpur: बाजार से लेकर घर तक कर रहे कोरोना से बचाव के लिए जरूरी प्रोटोकाल का पालन Gorakhpur News

कोरोना में मास्‍क लगाए युवती का फाइल फोटो, जेएनएन।

पिछले साल मार्च महीने से देश में आई इस बीमारी से बहुत से लोग अभी भी बचे हैं। उसका एकमात्र कारण है कि वे पूरी सतर्कता बरतते हैं। बाहर निकलकर अपना काम भी करते हैं और सुरक्षा का ख्याल भी रखते हैं।

Satish Chand ShuklaMon, 19 Apr 2021 02:05 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए सबसे जरूरी है कि इससे बचाव के लिए निर्धारित प्रोटोकाल का पालन किया जाए। कुछ जागरूक लोग ऐसा करके स्वयं एवं अपने स्वजन की रक्षा कर रहे हैं। वे सतर्कता के हथियार से कारोना पर वार करने में सफल हैं। ऐसे लोगों में दुकानदार भी शामिल हैं और नौकरीपेशा लोग भी। बाजार, कार्यस्थल से लेकर घर तक वे कभी भी प्रोटोकाल की लक्ष्मण रेखा को नहीं लांघते। यही कारण है कि खुद के साथ दूसरों को भी सुरक्षित रख रहे हैं।

अब तक 28 हजार लोग संक्रमित

जिले की करीब 48 लाख की आबादी में 16 अप्रैल तक लगभग 28 हजार लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 18 हजार से अधिक लोग स्वस्थ हो चुके हैं और कई लोग स्वस्थ होने की स्थिति में हैं। पिछले साल मार्च महीने से देश में आई इस बीमारी से बहुत से लोग अभी भी बचे हैं। उसका एकमात्र कारण है कि वे पूरी सतर्कता बरतते हैं। बाहर निकलकर अपना काम भी करते हैं और सुरक्षा का ख्याल भी रखते हैं। इनमें से जो दुकानदार हैं, वे मास्क पहनकर बैठते हैं, ग्राहक को काउंटर से दूर रखते हैं। सैनिटाइजर का समय-समय पर प्रयोग करते रहते हैं। ऐसे लोग पहली लहर में तो पाजिटिव होने से बचे ही, दूसरी लहर में भी कोरोना को दूर रखने में अबतक सफल हैं।

सामान देने से पहले ग्राहक को करते हैं सैनिटाइज

शहर के राप्तीनगर में बेकरी, दूध व आइस्क्रीम की दुकान चलाने वाले विपिन कुमार श्रीवास्तव पिछले साल के लाक डाउन से लेकर अब तक प्रोटोकाल का सख्ती से पालन कर रहे हैं। उनकी दुकान पर भीड़ हुई लेकिन चेहरे से कभी मास्क नहीं उतरा। इस बार भी उन्होंने काउंटर से दूर रस्सी बांध रखी है ताकि कोई नजदीक न आए। कुर्सी पर बैठे-बैठे काम करने की बजाय व रस्सी तक जाकर सामान देना उचित समझते हैं। वह सामान देने से पहले ग्राहक का हाथ भी सैनिटाइज करवाते हैं। उनका जोर आनलाइन पेमेंट कराने पर होता है। वह और उनका परिवार अब तक कोरोना से बचा है।

नहाने के बाद ही घर का कोई सामान छूते हैं डाक्‍टर पवन

चरगांवा निवासी और स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) से जुड़े डाक्टर पवन कुमार सैकड़ों कोरोना पाजिटिव लोगों के घर जा चुके हैं। पर, सतर्कता का पूरा ध्यान रखते हैं। मास्क लगाने के साथ ही व दो गज की दूरी का भी ध्यान रखते हैं। नियमित रूप से हाथ धाने के साथ समय-समय पर फेस शील्ड भी लगाते हैं। घर जाते ही सारे कपड़े बाहर निकाल देते हैं। पवन का कहना है कि इस महामारी से सतर्कता ही बचाव है। नहाने के बाद ही घर का कोई सामान छूते हैं।

सतर्कता से यह भी बचे

गोरखनाथ क्षेत्र के निवासी युवा सामाजिक कार्यकर्ता अमित सिंह पटेल ने भी सतर्कता के जरिए ही स्वयं को कोरोना से अब तक बचाए रखा है। लाकडाउन के समय उन्होंने जानवरों का पेट भरने की मुहिम भी चलायी थी। वह कहते हैं कि रंगकर्म से भी जुड़ा होने के कारण उनका शहर से बाहर भी आना-जाना होता रहा लेकिन उन्होंने स्वयं को सुरक्षित रखा।

पिपराइच निवासी विकास कुमार गुप्ता घर-घर जाकर बच्‍चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं। लाकडाउन के बाद उनका यह काम जारी था। जहां भी वह जाते मास्क लगाकर जाते। जिन बच्‍चों को पढ़ाते, उन्हें भी मास्क लगाने को कहते। सैनिटाइजर हमेशा उनकी जेब में होता। वह कहते हैं कि सतर्कता के कारण ही अब तक कोरोना से बचे हैं।

जरूरी है इन नियमों का पालन

दो गज की दूरी का पालन करें।

अनावश्यक घर से बाहर न निकलें।

मास्क का इस्तेमाल करें और भीड़भाड़ से बचें

हाथों को साबुन समय-समय पर धोते रहें। बाहर हों तो सैनिटाइज करें

खांसते-छींकते समय मास्क, कोहनी रुमाल का इस्तेमाल करें।

कोविड का लक्षण दिखे तो जांच अवश्य करवाएं।

45 वर्ष से अधिक उम्र के हैं तो कोविड का टीका जरूर लगवा लें।

कोविड टीके की दोनों डोज लगने के बाद भी मास्क, शारीरिक दूरी और स्व'छता के नियमों का पालन करें।

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