UP के इस जिले में एक घर में रहता है 116 लोगों का परिवार Gorakhpur News

पूरे परिवार के साथ कुंवर गुलाब सिंह। जागरण

रामकंवल शुक्ल आमतौर पर तो बेहद गंभीर नजर आते हैं लेकिन इन दिनों इनके चेहरे की खुशी की नोटिस गांव का हर कोई ले रहा है। भिटहां बांसगांव के रहने वाले रामकंवल की खुशी की वजह लाकडाउन की चलते उनके 116 लोगों के परिवार का उनके साथ होना है।

Rahul SrivastavaSun, 16 May 2021 12:10 PM (IST)

डा. राकेश राय, गोरखपुर : 80 वर्ष के रामकंवल शुक्ल आमतौर पर तो बेहद गंभीर नजर आते हैं लेकिन इन दिनों इनके चेहरे की खुशी की नोटिस गांव का हर कोई ले रहा है। भिटहां बांसगांव के रहने वाले रामकंवल की खुशी की वजह लाकडाउन की चलते उनके 116 लोगों के परिवार का उनके साथ होना है। ऐसा अवसर शादी-ब्याह में ही मिलता है, वह भी दो-चार दिन के लिए। रामकंवल बताते हैं कि उनके परिवार के सुधाकर दिल्ली में, पंकज झांसी में और विवेक लखनऊ में व्यवसाय करते हैं और अपनी व्यवसायिक व्यस्तता चलते गांव कम ही आ पाते हैं। लाकडाउन के चलते ही सही उनका गांव आना सुकुनदायी है। इस महामारी में घर के सभी सदस्य उनके सामने रहें, इससे ज्यादा सुकून और खुशी की क्या बात हो सकती है। सुधाकर, पंकज और विवेक कहते हैं लाकडाउन की वजह से व्यवसाय में ठहराव आ जाने का तो उन्हें दुख है लेकिन पूरे परिवार के साथ रहने की खुशी भी उससे कम नहीं।

लाकडाउन में पूरा परिवार है साथ

शहर के इंदिरा नगर में रहने वाले 74 वर्षीय कुंवर गुलाब सिंह के परिवार की खुशहाली भी इन दिनों देखने लायक है। लाकडाउन के चलते खूटभार बड़हलगंज निवासी गुलाब सिंह के पूरे परिवार का इकट्ठा हो जाना, परिवार की खुशी की वजह है। गुलाब सिंह बताते हैं कि ऐसा अवसर कम ही मिल पाता है कि उनके चारों लड़के पास रह पाएं। बड़े बेटे श्रीप्रकाश ठेकदारी के लिए लखनऊ में बसे हैं तो छोटे बेटे नीरज कोचिंग चलाने के सिलसिले में दिल्लीवासी हो गए हैं। अति व्यस्तता के चलते चाहकर भी उनका जल्दी घर आना संभव नहीं होता। लाकडाउन हुआ तो दोनों ने इसका फायदा उठाया और परिवार सहित गोरखपुर आ गए। लंबे समय बाद पूरा परिवार साथ है तो सभी एक-एक पल का लुत्फ उठा रहे। गुलाब सिंह पूरे परिवार को साथ देखकर उन दिनों में खो जाते हैं, जब वह संयुक्त परिवार का हिस्सा थे। पूरे परिवार के साथ रहने का अवसर देने के लिए वह लाकडाउन को धन्यवाद देते हैं।

जितना मजबूत परिवार, उतना ही समृद्ध समाज

दरअसल परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई जरूर है लेकिन समाज का ढांचा इसी छोटी इकाई की नींव पर टिका है। यानी परिवार जितना मजबूत होगा, समाज उतना ही समृद्ध। मगर आर्थिक संपन्नता की चाहत ने इस सर्वमान्य अवधारणा पर गहरा आघात किया है। जिस संयुक्त परिवार के आधार पर यह अवधारणा बनी थी, वह अब शायद ही कहीं नजर आती है। आर्थिक मजबूती के लिए ज्यादातर संयुक्त परिवार अब कई एकल परिवार में बंटे दिखाए देते हैं। अब यह तो नहीं कहा जा सकता कि आर्थिक सम्पन्नता की चाहत नहीं होनी चाहिए लेकिन शायद ही कोई ऐसा एकल परिवार होगा, जिसे संयुक्त परिवार में न होने की कमी न खलती हो। विश्व परिवार दिवस वह अवसर है, जब हम एक बार फिर संयुक्त परिवार की खूबियों पर मंथन करें और कुछ हद तक पुरानी स्थिति बहाल करने की कोशिश भी।

इंटरनेट मीडिया से उठा रहे संयुक्त परिवार का लुत्फ

वैसे तो इंटरनेट मीडिया के विभिन्न माध्यम से सभी लोग खुद को दुनिया भर में बसे अपने लोगों के करीब पाने लगे हैं लेकिन व्यस्तता में इन माध्यमों से मिलने का अवसर भी कम ही मिल पाता है। लाकडाउन ने लोगों को यह अवसर खूब दिया है। बहुत से परिवार सुबह से शाम तक वर्चुअल तरीके से कई बार एक हो रहे। वीडियो कांफ्रेंसिंग ने इस काम को और आसान बना दिया है। बक्शीपुर में रहने वाले अभिषेक कुमार और बेतियाहाता में रहने वाले विनय मिश्रा बताते हैं कि उनके परिवार में 40 से ज्यादा सदस्य हैं लेकिन कोई दिल्ली एनसीआर बसा है तो कोई महाराष्ट्र में। सबने शाम को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मिलने का समय तय कर रखा है। तय समय पर जमकर मस्ती होती है।

 

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