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CBSE: 10वीं के चौदह हजार छात्रों का रिजल्ट तैयार कर रहे 936 शिक्षक Gorakhpur News

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद का प्रतीकात्‍मक फाइल फोटो, जेएनएन।

कोरोना की वजह से अब तक जो भी लेटलतीफी हुई है वह आगे न हो इसको देखते हुए बोर्ड ने स्कूलों को पहले ही निर्देशित कर दिया है। मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों को बोर्ड बाकायदे वेबिनार के जरिए पूरी गाइडलाइन की जानकारी भी दे चुका है।

Satish Chand ShuklaThu, 13 May 2021 02:05 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) के जिले के 117 स्कूलों के चौदह हजार छात्रों का रिजल्ट 936 शिक्षक तैयार कर रहे हैं। यह वह शिक्षक हैं जो स्कूलों में गठित मूल्यांकन समिति में शामिल हैं। बोर्ड से मिली गाइडलाइन के आधार पर ये न सिर्फ छात्र-छात्राओं को अंक देंगे बल्कि अंक देने पूरी सतर्कता के साथ ईमानदारी भी बरतेंगे।

कोरोना की वजह से अब तक जो भी लेटलतीफी हुई है वह आगे न हो इसको देखते हुए बोर्ड ने स्कूलों को पहले ही निर्देशित कर दिया है। मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों को बोर्ड बाकायदे वेबिनार के जरिए पूरी गाइडलाइन की जानकारी भी दे चुका है। बोर्ड के विशेषज्ञ शिक्षकों को छात्रों को अंक देने का फार्मूला भी बता चुके हैं।

टापर देने वाले स्कूल को होगा फायदा

गोरखपुर में जाे भी ऐसे स्कूल हैं, जिनमें इधर तीन साल में हाईस्कूल में टापर बच्चे निकले है तथा उनका रिजल्ट लगातार तीन साल से अच्छा जा रहा है तो उनके लिए कोरोनाकाल भी फायदेमंद साबित होगा। क्योंकि बोर्ड ने जो फार्मूला तैयार किया है उसके अनुसार टापर या अच्छा रिजल्ट देने वाले स्कूलों की मार्किंग अच्छी रहेगी। इन स्कूलों के छात्रों को अच्छे नंबर मिलेंगे। जबकि वहीं जिन स्कूलों को लगातार रिजल्ट खराब जा रहा है उन्हें इस बार भी कोई राहत नहीं मिलेगी। बोर्ड के फार्मूला के अनुसार पिछले तीन साल के रिजल्ट के हिसाब से ही इन स्कूलों का इस बार भी परिणाम रहेगा।

स्‍कूलों में चल रहा मूल्‍यांकन कार्य

सीबीएसई के जिला समन्वयक अजीत दीक्षित का कहना है कि सीबीएसई के दसवीं के छात्रों के रिजल्ट तैयार करने के लिए स्कूलों में मूल्यांकन कार्य तेजी से चल रहा है। इसके लिए गठित मूल्यांकन समिति के शिक्षकों को बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार छात्रों को अंक देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही उन्हें पूरी सतर्कता के साथ ईमानदारी पूर्वक छात्रों को नंबर देने को कहा गया है, ताकि किसी छात्र का परीक्षा परिणाम अंक के कारण खराब न हो।

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