कस्तूरबा के 45 शिक्षकों की नौकरी खतरे में, जानें-क्या है कारण Gorakhpur News

कस्तूरबा के 45 शिक्षकों की नौकरी खतरे में, जानें-क्या है कारण Gorakhpur News

बीएसए का कहना है कि शासनादेश के अनुसार इस संबंध में विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इनका संविदा अनुबंध आगे विस्तारित नहीं किया जाएगा।

Publish Date:Mon, 03 Aug 2020 06:30 PM (IST) Author: Satish Shukla

गोरखपुर, जेएनएन। जनपद के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में कार्यरत 45 शिक्षकों की नौकरी खतरे में है। इनमें विद्यालय में एक विषय में एक से अधिक, निर्धारित विषयों के अतिरिक्त शिक्षक तथा फुल टाइम की जगह पार्ट टाइम व पार्ट टाइम की जगह फुल टाइम कार्यरत शिक्षकों की संविदा का नवीनीकरण नहीं होगा। जनपद के 20 कस्तूरबा विद्यालयों में 21 शिक्षक मुख्य विषय के पार्ट टाइम तथा पाठ्य सहगामी विषयों के 24 फुल टाइम शिक्षक हैं। शासन के निर्देशानुसार इनकी संविदा का नवीनीकरण नहीं होगा। पूरे प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या 1781 है।

यह है पूरा मामला

आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के अनुसार मुख्य विषय हिंदी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विषय व अंग्रेजी के शिक्षक फुल टाइम होने चाहिए। इसी प्रकार पाठ्य सहगामी विषयों के (शारीरिक शिक्षा, कंप्यूटर, कला क्राफ्ट व गृह विज्ञान) के शिक्षक पार्ट टाइम होने चाहिए। बीएसए भूपेन्द्र नारायण सिंह का कहना है कि शासनादेश के अनुसार इस संबंध में विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इनका संविदा अनुबंध आगे विस्तारित नहीं किया जाएगा।

पांच साल में तैनात शिक्षकों-कर्मचारियों की रिपोर्ट भेजी

कस्तूरबा की विज्ञान शिक्षिका अनामिका शुक्ला प्रकरण के भंडाफोड़ के बाद से शासन स्तर से बेसिक शिक्षा विभाग में हुई नियुक्तियों से संबंधित एक-एक कर रिपोर्ट मांगी जा रही है। गत दिनों पिछले पांच सालों में तैनात शिक्षकों व कर्मचारियों की रिपोर्ट तलब की थी, जिसे आनन-फानन में तैयार कर बीएसए ने शासन को भेज दिया है। जनपद में 83 अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में 438 शिक्षक व कर्मचारी तैनात हैं, जिनका ब्योरा बीएसए ने भेज दिया है।

अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद से ही आगरा विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय से उपाधि हासिल करने वाले शिक्षक शासन के रडार पर हैं। जिला स्तर पर कस्तूरबा बालिका, अनुदेशक, शिक्षामित्र सभी के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है।  शिक्षकों के लिए मानव संपदा पोर्टल पर ब्योरा अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।  

बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण  ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में वर्ष 2015 के बाद नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।

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