Electricity corporation: बढ़ी सख्ती तो सामने आए 18 साल पुराने बकायेदार Gorakhpur News

बिजली बिल जमा करने के संबंध में मीटर का फाइल फोटो।

एक बार भी बिल न जमा करने वाले 2.65 लाख उपभोक्ताओं पर 118 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें नए उपभोक्ता भी शामिल हैं। बिजली बिल की वसूली की असली समस्‍या यही उपभोक्‍ता हैं। अब इन्‍हीं से बिजली बिल जमा कराया जा रहा है।

Publish Date:Wed, 02 Dec 2020 05:50 PM (IST) Author: Satish Shukla

गोरखपुर, जेएनएन। कनेक्शन लेने के बाद बिजली का बिल न जमा करने वाले उपभोक्ताओं पर अफसरों की सख्ती काम कर रही है। गोरखपुर जोन में 18 साल पहले कनेक्शन लेने वाले भी बिल जमा करने के लिए सामने आ रहे हैं। अब तक 12 हजार उपभोक्ता बिजली निगम के खाते में 9.30 करोड़ रुपये जमा कर चुके हैं।

118 करोड़ है बकाया

एक बार भी बिल न जमा करने वाले 2.65 लाख उपभोक्ताओं पर 118 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें नए उपभोक्ता भी शामिल हैं। बिजली बिल की वसूली की असली समस्‍या यही उपभोक्‍ता हैं। बताते हैं कि जबसे बिजली कनेक्‍शन लगा है तभी से गोरखपुर शहर के 2.65 लाख उपभोक्‍ताओं ने बिजली जमा करना उचित ही नहीं समझा। विभाग का पूरा जोर अब इन उपभोक्‍ताओं पर है। इन उपभोक्‍ताओं से न केवल बिजली बिल जमा कराना है, अपितु नियमित भी करना है ताकि भविष्‍य में बिजली बिल जमा करने में किसी तरह की आनाकानी न कर सकें।

बिल नहीं मिलना बड़ी वजह

मुख्य अभियंता देवेंद्र सिंह ने बताया कि वर्षों बाद जिन उपभोक्ताओं ने रुपये जमा किए, उनका कहना था कि उन्हें कभी बिजली का बिल ही नहीं मिला। अब समय से बिल मिल जाए तो वह जमा करते रहेंगे। जिन उपभोक्ताओं का ज्यादा बिल है उन्हें पार्ट पेमेंट की सुविधा दी गई है। उपभोक्‍ताओं को इससे बड़ी राहत मिली है।

इतने उपभोक्ताओं ने जमा किए रुपये

शहर में 500, ग्रामीण मंडल प्रथम     3143, ग्रामीण मंडल द्वितीय 1911, कुशीनगर मंडल 3255, देवरिया मंडल 1470, महराजगंज मंडल में 2923 उपभोक्ताओं ने बिल जमा किया है।

सड़क पर गिरी केबल बन रही हादसे की वजह

गोरखपुर शहर की गलियों में गिरी टीवी सेट टाप बाक्स की केबल हादसे की वजह बन रही है। शाहपुर के धर्मपुर प्रगति विहार निवासी सेवानिवृत्त सिविल इंजीनियर खलीक अहमद सिद्दीकी केबल में फंसकर चोटिल हो गए। उन्होंने बताया कि शहर की कई गलियों में केबल सड़क पर गिरी रहती है। इनमें फंसकर राहगीर आए दिन हादसों का शिकार बन रहे हैं।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.