हाइपरटेंशन से ग्रस्त है जिले का प्रत्येक चौथा व्यक्ति

गोंडा: वक्ता बदला, लोगों की सोच बदली। रहन-सहन से लेकर खानपान का तरीका भी। किसी की दिनचर्या प्रभावित हुई तो कोई काम के बोझ से दब गया। नतीजन, वह बीमारी के दायरे में आ गया। नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर, डायबिटीज, कार्डियोवेस्क्युलर डिसीजेज एंड स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) के आंकड़ों के मुताबिक जिले का हर चौथा व्यक्ति हाईपरटेंशन की गिरफ्त में है।

जिला अस्पताल में एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिसीजेज) सेल की क्लीनिक में अप्रैल से फरवरी तक कुल 14 हजार 47 मरीजों की जांच हुई। जिसमें डायबिटीज, कैंसर सहित अन्य की जांच की गई। इसमें हाईपरटेंशन के 3262 मरीज मिले। जिसमें 1696 पुरुष व 1566 महिलाएं शामिल हैं। इसके साथ ही 534 पुरुष व 364 महिलाएं ऐसी हैं, जो डायबिटीज व हाइपरटेंशन दोनों की चपेट में हैं। अकेले फरवरी के आंकड़ों पर गौर करें मो हाइपर टेंशन के 381 मरीज सामने आए हैं। एनसीडी सेल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्येश बरनवाल का कहना है कि खानपान के कारण सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता उमेश कुमार का कहना है कि सबसे ज्यादा दिक्कत युवाओं में देखने को मिल रही है। हालांकि हर उम्र के लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। इनसेट

जानें हाईपरटेंशन

- हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह का कहना है कि बीमारी से धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ने लगता है। सामान्य ब्लड प्रेशर 120-80 मिलीमीटर ऑफ मरकरी होना चाहिए, मगर इसमें यह बढ़ता है। ऊपर का रक्तचाप 140 से 180 व नीचे का 90 से 110 या इससे अधिक तक पहुंच जाता है। ऐसे में धमनियों में रक्त प्रवाह को सामान्य रखने के लिए दिल को अधिक काम करने की जरूरत पड़ती है। इससे हार्टअटैक, ब्रेन हेमरेज, पैरालिसिस व स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

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हाईपरटेंशन के लक्षण

काउंसलर सरिता तिवारी का कहना है कि हाईपरटेंशन में घबराहट के साथ तेज सिरदर्द होने लगता है। चक्कर आता है, मतली के साथ ही नाक से खून भी आ जाता है। यही नहीं, थकान, आंख की समस्या, छाती में दर्द, सांस की समस्या व हृदयगति अनियमित हो जाती है। धूमपान, तंबाकू सेवन व अत्यधिक मदिरापान, मोटापा या अधिक वजन होना के साथ ही तनाव भी इसका लक्षण है।

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जिम्मेदार के बोल

हाइपरटेंशन सहित अन्य बीमारियों को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक क्लीनिक व कैंप लगाए जा रहे हैं। उसकी मॉनीटरिग भी की जा रही है।

- डॉ. एसके श्रीवास्तव, सीएमओ गोंडा

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