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कटान से 64 बीघा भूमि गंगा में समाहित

जासं, गाजीपुर : गंगा के घटने से लगातार हो रही भूमि कटान से पीड़ितों में दहशत है। दो दिनों के अंदर 64 बीघा भूमि गंगा में समाहित हो गई। इसमें शेरपुर तुलसीपुर में 39 व सेमरा के परिया-61 में 25 बीघा भूमि शामिल है। शुक्रवार को दिन भर रुक-रुक कर कटान का सिलसिला जारी रहा। कटान रोकने के लिए ठोस उपाय न होने से पीड़ितों में आक्रोश पनप रहा है।

मुहम्मदाबाद : सेमरा के परिया-61 से लेकर शेरपुर मुबारकपुर भागड़ के बीच दो दिनों के अंदर करीब 25 बीघा कृषि भूमि गंगा में समाहित हो गई। राजकीय नलकूप गंगा तट से कुछ ही दूरी पर रह गया है। कटान प्रभावित सेमरा व शिवरायकापुरा गांव को बचाने के लिए शासन की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर गांव के पश्चिम सिरे से रामतुलाई तक ठोकर का निर्माण कराया गया। इस निर्माण के चलते गांव पूरी तरह से सुरक्षित है। बाढ़ के दौरान करीब 50 बीघा से अधिक कृषि भूमि धारा में समाहित हो गयी। इन किसानों की भूमि गंगा में समाहित

: अब परिया 61 से लेकर शेरपुर मुबारकपुर भागड़ तक रुक-रुक कटान हो रही है। कटान के चलते गोवर्धन यादव, मदन यादव, नथुनी यादव, संवरू यादव, प्रद्युम्मन यादव, विनोद राय, अवधेश तिवारी, रमेशर राय, चंद्रबलि राय, योगेंद्र राय, दीनानाथ राय, चुम्मन राय, कमला यादव, राधेश्याम राय, बजरंगी यादव, अजय राय, चंद्रबलि राय, दीनानाथ राय, भोला यादव, अमीरचंद यादव, प्रताप यादव, बूढ़ा यादव सहित कई किसानों की 25 बीघा से अधिक कृषि भूमि गंगा में समाहित हो गई।

किसानों को नहीं सूझ रहा कोई उपाय

करंडा : शेरपुर तुलसीपुर में दो दिनों के अंदर 39 बीघा भूमि गंगा में समाहित हो गई। इसके लेकर महाबलपुर, गद्दोगाड़ा, दीनापुर, तुलसीपुर के किसान परेशान हैं। आंखों के सामने गंगा में समाहित हो रही भूमि देखने को विवश हैं। कटान से राहत का कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। गोसन्देपुर निवासी विनीत सिंह की 13 बीघा जमीन मौजा शेरपुर-तुलसीपुर में है। इसमें से केवल एक या डेढ़ बीघा ही जमीन ही बची है। शेष गंगा में समाहित हो गई है। इसी तरह मनीष सिंह, अंतिमा सिंह, अजीत सिंह, अनिल सिंह, सुरेंद्र प्रताप सिंह, नीलम सिंह, शशिकांत सिंह, अरविद सिंह आदि की जमीन गंगा में समाहित हो चुकी है। इस भूमि पर परवल आदि की खेती होती थी। किसानों ने सरकार से मुआवजा दिलाने की मांग की है।

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