साइबर अपराध से बचाएगी आपकी थोड़ी-सी समझदारी : अभय कुमार मिश्र

पुलिस उपाधीक्षक अभय कुमार मिश्र का जन्म 1982 में कुशीनगर जिले में हुआ। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कुशीनगर में पूरी करने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान विषय में परास्नातक की शिक्षा ली।

JagranSun, 19 Sep 2021 08:31 PM (IST)
साइबर अपराध से बचाएगी आपकी थोड़ी-सी समझदारी : अभय कुमार मिश्र

पुलिस उपाधीक्षक अभय कुमार मिश्र का जन्म 1982 में कुशीनगर जिले में हुआ। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कुशीनगर में पूरी करने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान विषय में परास्नातक की शिक्षा ली। पिता आनंद कुमार मिश्र सिचाई विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वह वर्ष 2007 में पुलिस विभाग में बतौर पुलिस उपाधीक्षक भर्ती हुए। देवरिया, महाराजगंज, गोरखपुर व लखनऊ में सेवाएं दीं। वर्तमान में साइबर सेल प्रभारी व इंदिरापुरम पुलिस क्षेत्राधिकारी के पद पर तैनात हैं। अब तक के सेवाकाल में उत्कृष्ट व वीरतापूर्वक असाधारण प्रदर्शन के लिए वर्ष 2018 में पुलिस महानिदेशक का प्रशंसा चिह्न रजत पदक और वर्ष 2020 में पुलिस महानिदेशक का प्रशंसा चिह्न स्वर्ण पदक पा चुके हैं।

----------

वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी का हमारे जीवन में व्यावसायिक व सामाजिक ²ष्टि से बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। अपराधी इसी का फायदा उठा रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी का सहारा लेकर वे अपराध कर रहे हैं। लोगों की गाढ़ी कमाई पर आनलाइन डाका डाल रहे हैं। महिला संबंधी अपराधों को भी अंजाम दे रहे हैं। जनपद में हर माह औसतन 350 साइबर अपराध हो रहे हैं। तकनीकी शिक्षा के अभाव के कारण स्थानीय पुलिस इसे रोकने में सफल नहीं हुई तो साइबर सेल का गठन हुआ। साइबर सेल ने साइबर अपराध से जुड़े कई बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। जिले में आठ माह में ठगी के शिकार 40 लोगों का करीब 50 लाख रुपये उनके बैंक खाते में वापस कराया गया है। युवतियों को परेशान करने वाले छात्र को दबोचा गया है। लोग थोड़ी-सी समझदारी दिखाकर साइबर अपराध का शिकार होने से बच सकते हैं। इस सिलसिले में दैनिक जागरण के अवनीश मिश्र ने साइबर सेल प्रभारी गाजियाबाद अभय कुमार मिश्र से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश..

-------

- मौजूदा समय में किस-किस तरह के साइबर अपराध सामने आ रहे हैं? साइबर अपराध करने वाले डेबिट व क्रेडिट कार्ड क्लोन व फोन काल कर आनलाइन ठगी करते हैं। आनलाइन सामान क्रय-विक्रय व नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों को ठगते हैं। कंप्यूटर, मोबाइल व ईमेल हैक कर अपराध करते हैं। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से महिलाओं से संबंधित अपराध करते हैं। लिक व एप डाउनलोड कराकर आनलाइन चूना लगाते हैं।

--------

-डेबिट व क्रेडिट कार्ड की क्लोनिग कर होने वाली ठगी से कैसे बचा जा सकता है? सुरक्षाकर्मी वाले एटीएम बूथ का प्रयोग करें। पिन छिपाकर डालें। पिन समय-समय पर बदलते रहें। कार्ड का नंबर किसी व्यक्ति को नहीं बताएं। भुगतान करने के लिए अपना डेबिट या क्रेडिट कार्ड किसी के हाथ में न दें। स्विप मशीन में उसे स्वयं लगाएं।

--------

-फोन करके होने वाली ठगी से कैसे बचें? फोन पर बैंक संबंधी जानकारी किसी से भी साझा न करें। संदेश से प्राप्त लिक ओपन न करें। बैंक खाते में कोई भी अपडेट बैंक जाकर ही करें। फोन पर आए ओटीपी किसी से भी साझा न करें। इनाम व लाटरी संबंधी संदेश आने पर आवेदन न करें। एनीडेस्क, टीम व्यूअर आदि एप मोबाइल में बिल्कुल इंस्टाल न करें।

--------

-आनलाइन सामान क्रय-विक्रय के दौरान ठगी हो जाती है। इससे कैसे बचा जा सकता है? आनलाइन खरीदारी करते समय मान्यता प्राप्त साइट व एप का ही प्रयोग करें। खरीदारी करने से पहले जांच लें कि सामान सही है या नहीं। कोई अज्ञात व्यक्ति आनलाइन भुगतान के लिए कहे तो उससे बचें। सामान क्रय-विक्रय के दौरान पैसे के आनलाइन लेन-देन से बचें। अपना आधार कार्ड, पैनकार्ड व अन्य दस्तावेज किसी को आनलाइन साझा न करें।

-------

-नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वालों से कैसे बचा जा सकता है? निजी वेबसाइट आदि पर अपना बायोडाटा बिल्कुल भी अपलोड न करें। रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसा जमा करते समय संबंधित कंपनी के बैंक खाता का सत्यापन जरूर कर लें। जिस नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया है, यदि इस संबंध में कोई लिक मोबाइल पर आता है, तो उसे न खोलें।

--------

-इंटरनेट मीडिया संबंधित अपराधों में वृद्धि हुई है। महिलाएं भी इस अपराध का शिकार हो रही हैं। आखिर इससे कैसे बचा जा सकता है? हमेशा टू-स्टेप वेरिफिकेशन आन रखें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। अपना पासवर्ड किसी से साझा न करें। फेसबुक पर कोई अज्ञात लिक ओपन न करें। जहां तक संभव हो लोकेशन फीचर इनेबल न करें। किसी के मोबाइल या कंप्यूटर पर अपना इंटरनेट मीडिया खाता खोलने से बचें।

--------

-कंप्यूटर और ईमेल हैक कर होने वाले अपराध को कैसे रोका जा सकता? हमेशा अपडेटेड एंटीवायरस का प्रयोग करें। डिफाल्ट ब्राउजर का प्रयोग करें। पायरेटेड विडोज के प्रयोग से बचें। पायरेटेड एंटीवायरस प्रयोग न करें। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिक को क्लिक न करें। प्रतिबंधित वेबसाइट को ओपन करने से बचें।

----------

-इन दिनों यूपीआई के माध्यम से ठगी हो रही हैं। आखिर इससे कैसे बचा जा सकता है? आनलाइन आने वाले क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें। अज्ञात यूपीआइ ट्रांजेक्शन लिक ओपन न करें। कभी भी अपना ओटीपी किसी से भी साझा न करें। कोई भी लिक किसी अन्य मोबाइल नंबर पर फारवर्ड न करें।

---------

-साइबर अपराध होने पर लोग आखिर कहां शिकायत करें? साइबर अपराध होने पर 155260 पर काल कर या यूपीकाप एप पर आनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इन दोनों के अलावा निकटतम साइबर सेल या स्थानीय थाना में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। आनलाइन ठगी होने पर जितनी जल्दी हो सके शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, पैसे की वापसी की संभावना उतनी ही अधिक हो जाएगी।

------

-साइबर अपराध रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को कोई विशेष प्रशिक्षण दिया गया है या नहीं? साइबर अपराध रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलते रहते हैं। इसी का नतीजा है कि साइबर अपराध करने वाले पकड़े जा रहे हैं। जल्द ही सभी थानों में साइबर सेल डेस्क शुरू होगी।

--------

-साइबर अपराध को रोकने व अपराधियों को पकड़ने के लिए आपकी क्या रणनीति है? साइबर अपराध रोकने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। लोग अगर जागरूक हो जाएं तो साइबर अपराध में काफी कमी आ जाएगी। इस कारण साइबर अपराध से बचने के उपाय संबंधी पर्चे बांटे गए हैं। जल्द ही कालेजों व कालोनियों में संगोष्ठी की जाएगी। साइबर अपराधियों को पकड़ने व अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। उससे सफलता भी मिल रही है। कई बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया गया है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.