दो साल से न्याय के लिए भटक रहा ठगी का शिकार युवक

दो साल से न्याय के लिए भटक रहा ठगी का शिकार युवक
Publish Date:Thu, 24 Sep 2020 07:22 PM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता,मोदीनगर:

सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर युवक से छह लाख रुपये की ठगी के मामले में आरोपित अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। जबकि, पीड़ित लगातार आरोपितों की गिरफ्तारी और अपनी गाढ़ी कमाई को वापस दिलाने की मांग कर रहा है। पुलिस अधिकारी जल्द ही आरोपित की गिरफ्तारी की बात कह रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपित इससे पहले भी कई लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना चुका है।

पीलीभीत निवासी विकास सिंह ने 2016 में मेरठ के एक कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई की थी। उसके संपर्क में मोदीनगर के श्रीराम कॉम्पलेक्स निवासी सीए विनीत गोयल आया। उसने विकास की सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर उससे छह लाख रुपये तय किए। विकास सिंह ने तीन किस्तों में आरोपित को राशि दे दी।

आरोपित ने उसको फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिया, लेकिन कहीं पर भी नियुक्ति न होने पर पीड़ित ने उससे संपर्क किया। आरोपित विकास को बार-बार टरकाता रहा और दूसरे विभाग में जल्द ही नौकरी लगवाने का झांसा देता रहा। परेशान होने पर पीड़ित ने इसकी शिकायत 20 जनवरी 2020 को एसएसपी से की थी। एसएसपी ने जांच कराकर मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के मोदीनगर पुलिस को आदेश दिए थे। विनीत गोयल के अलावा पीड़ित ने दिलीप, योगेंद्र गौतम, सुशील गुप्ता, वंदना शर्मा को भी नामजद किया था। मामले की पुलिस विवेचना कर रही है।

इस बारे में एसएचओ जयकरण सिंह का कहना है कि आरोपित विनीत इससे पहले भी कई लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना चुका है। तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। जल्द ही उसको गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाएगा।

इसके अलावा कृषि भूमि दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी के मामले में पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। सत्यप्रकाश निवासी गोविदपुरी का आरोप है कि उसने कॉलोनी निवासी युवक को 10 लाख रुपये पेशगी देकर उससे मुरादनगर में कृषि भूमि दिलाने का सौदा किया था। आरोप है कि डेढ़ करोड़ से ज्यादा की रकम आरोपित ने उससे नकद ले ली और आरोपित बैनामे के नाम पर उसको रोजाना टरका रहा है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी। सीओ मोदीनगर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति के पास केवल 10 लाख का रिकॉर्ड है। जांच की जा रही है कि उसने नकद पैसा दिया है या नहीं।

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