मौत के सामने दीवार बनी बारिश, बचा ली कई जिंदगियां

मौत के सामने दीवार बनी बारिश, बचा ली कई जिंदगियां

गाजियाबाद जयराम के शव को जब घर से अंतिम संस्कार के लिए श्मशान स्थल ले जाया जाने लगा उस वक्त घर के बाहर 100-125 लोगों की भीड़ थी। रविवार को छुट्टी होने के कारण आस-पड़ोस के ज्यादातर लोग घर पर ही थे।

JagranSun, 03 Jan 2021 09:06 PM (IST)

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद: जयराम के शव को जब घर से अंतिम संस्कार के लिए श्मशान स्थल ले जाया जाने लगा, उस वक्त घर के बाहर 100-125 लोगों की भीड़ थी। रविवार को छुट्टी होने के कारण आस-पड़ोस के ज्यादातर लोग घर पर ही थे। हालांकि श्मशान स्थल तक पहुंचने वालों की संख्या 60 रही। बारिश के कारण कई लोग घर पर ही रुक गए थे। जिससे वह हादसे की चपेट में आने से बच गए।

मूलरूप से मेरठ के नारंगपुर गांव निवासी 70 वर्षीय जयराम संगम विहार में किराए के मकान में परिवार के साथ रहते थे। वे फल और सब्जी बेचने का काम करते थे। परिवार में पत्नी मुन्नी देवी, दो बेटे प्रदीप, दीपक और बेटियां पूनम, पुष्पा शादीशुदा हैं। उनकी पुत्रवधू प्रीति और मुनेश ने बताया कि जयराम बीमार रहते थे। शनिवार रात 10 बजे उनको हार्ट अटैक आया। उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां रात साढ़े 12 बजे उनकी मौत हो गई। शव को घर ले आया गया।

जयराम की मौत की सूचना पर उनके घर रिश्तेदारों का मेरठ, मुजफ्फरनगर, दिल्ली, गाजियाबाद में अलग-अलग स्थानों से आना शुरू हो गया। जयराम से आसपास के लोगों का मिलना-जुलना था। आस-पड़ोस के लोग भी जयराम की मौत की सूचना पाकर पहुंचे। जिस वक्त घर से जयराम का शव श्मशान स्थल के लिए ले जाया जाने लगा, घर पर करीब 100 लोग मौजूद थे। बारिश के कारण आधे लोग श्मशान स्थल तक नहीं गए। वे कालोनी में ही रुक गए। अगर वे भी वहां जाते, तो हादसे की चपेट में आ सकते थे। मौन व्रत धारण करने से पहले हुआ हादसा: पुजारी

जयराम के शव को अंतिम संस्कार कराने वाले पुजारी संजय ने फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि श्मशान स्थल पर 50-60 लोग आए थे। गैलरी में लोगों को इकट्ठा कर वह फूल चुगने के समय के बारे में जानकारी दे रहे थे। इसके बाद दो मिनट का मौन व्रत धारण करने के लिए कहते, लेकिन इससे पहले ही हादसा हो गया। ऐसे में जो लोग किनारे पर थे, वे गैलरी से बाहर निकल लिए। अगर मौन व्रत धारण करने के दौरान हादसा हुआ होता, तो भी ज्यादा लोग चपेट में आ सकते थे।

वर्जन..

जयराम मेरे रिश्तेदार थे। बारिश के कारण मैं श्मशान स्थल के बाहर कार में ही बैठी थी, गैलरी में मैं नहीं गई।-मुन्नी वर्मा

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