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अफोर्डेबल हाउसिग नीति में मेट्रो और एलिवेटेड सेस लेने के प्रावधान का सुझाव

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : लघु मध्यम और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए ड्राफ्ट की गई अफोर्डेबल हाउसिग नीति को लेकर जीडीए ने शासन को सुझाव भेजे हैं। उसमें नीति के तहत बनने वाली आवासीय इकाइयों के विकास शुल्क की गणना के लिए मेट्रो और एलिवेटेड रोड प्रभावित क्षेत्रों में दोनों सेस लगाने के प्रावधान को शामिल करने का आग्रह किया है।

जीडीए के सीएटीपी आशीष शिवपुरी ने बताया कि शासन ने इस नीति का ड्राफ्ट भेजा था। उसमें लघु मध्यम और मध्यम वर्ग की आय सीमा का निर्धारण नहीं किया गया है। सुझाव दिया गया है कि दोनों वर्गों के लिए आय सीमा का निर्धारण किया जाए। आवासीय इकाइयों का न्यूनतम बिल्टअप एरिया 50 वर्ग मीटर और अधिकतम 110 वर्ग मीटर निर्धारित करने के साथ उसकी सीलिग कॉस्ट तय करने का सुझाव भी दिया है। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत ग्रुप हाउसिग और रो-हाउसिग विकसित होंगी। नीति के ड्राफ्ट में विकास शुल्क की गणना वर्ष 2014 में जारी नियमावली से करने का जिक्र किया गया है। सीएटीपी ने बताया कि गाजियाबाद में जोन-एक समेत कई क्षेत्र मेट्रो और एलिवेटेड रोड से लाभांवित होते हैं। ऐसे में सुझाव दिया गया है कि इन दोनों से लाभांवित होने वाले क्षेत्रों में नीति के तहत बनने वाली आवासीय इकाइयों की गणना करते वक्त मेट्रो और एलिवेटेड रोड सेस लगाने का प्रावधान किया जाए। विकासकर्ता के लिए परफॉर्मेंस गारंटी व बैंक गारंटी प्राधिकरण में बंधक रखने का प्रावधान करने की सलाह भी दी गई है। इससे प्रोजेक्ट को समय पर पूरा कराने में मदद मिलेगी।

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ये सुझाव भी दिए

- इकाइयों के हिसाब से शेल्टर फीस निर्धारित की जाए

- इंटीग्रेटेड और हाइटेक टाउनशिप में इस नीति को लागू न किया जाए

- इस नीति के तहत परियोजना की अवधि निर्धारित की जानी चाहिए

- रो-हाउसि के कॉमन सीढियों में आग से सुरक्षा के इंतजाम होने चाहिए

- प्राधिकरण की योजना में भूखंडीय विकास के लिए आवंटित भूमि पर नीति के मानक अनुमन्य न किए जाएं

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