विज्ञान की उन्नति के लिए वैज्ञानिक मनोवृत्ति आवश्यक

ऐतिहासिक काल से लेकर आधुनिक समय तक सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में अनुकरणीय परिवर्तन देखने को मिलता है। हमें इतिहास की पुस्तकों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि पहले के समय में परिवहन और संचार का माध्यम मनुष्यों और घोड़ों तक ही सीमित था।

JagranWed, 27 Oct 2021 07:59 PM (IST)
विज्ञान की उन्नति के लिए वैज्ञानिक मनोवृत्ति आवश्यक

ऐतिहासिक काल से लेकर आधुनिक समय तक सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में अनुकरणीय परिवर्तन देखने को मिलता है। हमें इतिहास की पुस्तकों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि पहले के समय में परिवहन और संचार का माध्यम मनुष्यों और घोड़ों तक ही सीमित था। कहीं-कहीं कबूतरों को संचार माध्यम के रूप में दर्शाया गया हैं। शत्रु राज्यों द्वारा आक्रमण की सूचना हो या युद्ध में जय-पराजय की सूचना, इन सभी के लिए मनुष्यों का ही उपयोग होने का उल्लेख मिलता है। आधुनिक कालखंड हो 'कलयुग' यानी मशीन युग कहा गया है। एक ऐसा कालखंड, जिसके अस्तित्व को बनाए रखने के लिए मशीनों का होना आवश्यक है। वर्तमान समय, जिसमें हम रह रहे हैं, जीवन पूर्णतया मशीनों पर निर्भर हो गया है। घर-बाहर, गांव-शहर, कोई उद्योग हो या कृषि कार्य। सभी क्रियाकलाप मशीन आधारित हो गए हैं। मशीन का निर्माण एक तकनीक है, जिसे सामान्य भाषा में विज्ञान कहते हैं। विज्ञान का विकास समय-समय पर आवश्यकतानुसार होता रहा है।

विज्ञान को इस ऊंचाई तक पहुंचाने की वैज्ञानिकों की लगन, धुन, उनकी मनोवृत्ति उनका वैज्ञानिक ²ष्टिकोण, इसी को वैज्ञानिक मनोवृत्ति कहते हैं। यही वैज्ञानिक मनोवृत्ति ही विज्ञान की इस उन्नति का मूल है। जैसे व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के विकास के लिए उचित मनोवृत्ति का होना आवश्यक है, उसी प्रकार विज्ञान की उन्नति के लिए वैज्ञानिक मनोवृत्ति जरूरी है। आज जीवन के हर क्षेत्र में विज्ञान का ही बोलबाला है।

हमारे भारतवर्ष के लिए भी यह अत्यंत गर्व की बात है कि हमारे संविधान के अनुच्छेद 51 (ए) एच में भी वैज्ञानिक मनोवृत्ति, मानवतावाद और उत्सुकता की भावना और सुधार की बात की गई है। आज के युग में जबकि हम हर क्षेत्र में सफलता अर्जित कर रहे हैं, वही दूसरी ओर आज भी हमारे समाज में बहुत अंधविश्वास फैला है। ऐसे में सवाल यह है कि क्यों हमें आज के समाज में और खासकर आज के युवा वर्ग में एक तार्किक, उत्सुक और वैज्ञानिक मस्तिष्क विकसित करने की जरूरत है। मेरे अनुसार हमारे चारों ओर जो भी घटित हो रहा है, उसका कुछ न कुछ कारण अवश्य है। यदि आज के युवा में कुछ भी नया जानने या करने की उत्सुकता न रहे तो हमारा विकास संभव नही हैं। दरअसल, सिर्फ धार्मिक तरीकों से प्रशिक्षित लोग अपने दिमाग की जिज्ञासा को बंद करने के आदी हो जाते हैं, जबकि विज्ञान आपको उत्सुक बनाता है, नई चीजों व खोज को विकसित करने के लिए।

हमारा भारतवर्ष जो कि विभिन्नताओं का देश है, यहां पर भी बहुत प्राचीन समय से ही विभिन्न धर्मों से जुड़े लोग, विभिन्न त्योहारों को मिलकर मनाने वाले और विभिन्न मान्यताओं को मानने वाले हैं। वहीं यदि हम इन मान्यताओं को आज विज्ञान से जोड़कर देखें, तो हम समझ पाएंगे कि इन सभी के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण ही है। यही कारण है कि हम सिर्फ विज्ञान ही नहीं धर्म के क्षेत्र में बहुत आगे हैं।

अत: यदि हम एक सफल समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो यह आवश्यक है कि हम अपनी आने वाली पीढि़यों को ऐसा ज्ञान दें कि उनमें एक वैज्ञानिक मनोवृत्ति का विकास हो सके। इससे हमारा देश, समाज और राष्ट्र विकास के पथ पर अग्रसर हो सके। हमारे अंदर वैज्ञानिक मनोवृत्ति का विकास तभी हो सकता है, जब हम अपने अज्ञान को स्वीकार करेंगे और जवाब खोजेंगे। विज्ञान में कुछ भी काल्पनिक नहीं होता, अपितु परिकल्पनाएं होती हैं। जो कई प्रयोगों द्वारा जांची जाती हैं। इसके बाद ही परिकल्पना को स्वीकार या नकारा जाता हैं। -मोहिनी बी. सैम्प्सन, प्रधानाचार्या, इंग्राहम इंग्लिश मीडियम स्कूल।

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