नया साल आया, महरौली के सात किसानों के लिए तोहफा लाया

नया साल आया, महरौली के सात किसानों के लिए तोहफा लाया

गाजियाबाद नया साल महरौली के सात किसानों के लिए खास तोहफा लेकर आया है। एक साल से प्रशासन पुलिस लोक निर्माण विभाग और एनएचएआइ से अपनी जमीन की कीमत को लेकर संघर्ष कर रहे किसानों की आखिरकार जीत हो गई है।

Publish Date:Thu, 31 Dec 2020 07:59 PM (IST) Author: Jagran

मदन पांचाल,गाजियाबाद: नया साल महरौली के सात किसानों के लिए खास तोहफा लेकर आया है। एक साल से प्रशासन, पुलिस, लोक निर्माण विभाग और एनएचएआइ से अपनी जमीन की कीमत को लेकर संघर्ष कर रहे किसानों की आखिरकार जीत हो गई है। जांच-पड़ताल और पैमाइश के बाद सरकारी स्तर पर अंतिम रिपोर्ट में मिला है कि उक्त किसानों की जमीन का पूर्व में कभी अधिग्रहण नहीं हुआ है। जमीन को शीघ्र क्रय अथवा अधिगृहित करने की तैयारी शुरू है। सरकारी रिकार्ड खंगालने पर जांच समिति ने पाया कि एनएचएआइ ने किसानों की जमीन पर गलत तरीके से सड़क निर्माण कार्य शुरू किया था। विरोध पर किसानों के खिलाफ एफआइआर तक दर्ज हुई। शासन के निर्देश पर कई बार इस प्रकरण की जांच एवं जमीन की पैमाइश भी हुई। 50 साल पुरानी फाइलों की हुई जांच:

महरौली के किसान तेजपाल सिंह पुत्र रामस्वरूप, राजवीर पुत्र चरणी, यशवीर पुत्र चरणी, बिजेंद्र सिंह पुत्र अमर सिंह,राजेन्द्र पुत्र अमर सिंह, बाबू पुत्र अमर सिंह और कमरपाल पुत्र अमर सिंह की खसरा संख्या-1008 की 236 वर्गमीटर और खसरा संख्या-1063 व 1064 की 1478 वर्ग मीटर जमीन है। इस जमीन पर एनएचएआइ द्वारा साल 2019 में सड़क चौड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया। किसानों ने विरोध भी किया। फरियाद लेकर डीएम तक गए। काम नहीं रूका, तो किसानों ने धरना शुरू कर दिया। काम रोक दिया गया। प्रशासन ने किसानों को शांतिभंग करने के आरोप में थाने में बंद कर दिया। राजनीतिक दवाब पर बाद में किसानों को छोड़ा गया। जांच में किसान अपनी जगह सही निकले। दरअसल, प्रशासन कहता रहा कि जमीन का 1972 एवं 1974 के बीच लोक निर्माण विभाग ने अधिग्रहण कर उचित प्रतिकर दे दिया गया था। किसान इससे इन्कार करते रहे। वर्जन..

जमीन पर सरकारी स्तर से जबरन कब्जा करते हुए सड़क का निर्माण किया गया। कई बार अधिकारियों से वार्ता हुई, लेकिन बेनतीजा रही। जमीन हमारी है। जब तक उचित दर पर प्रतिकर नहीं मिलेगा, सड़क निर्माण नहीं होने देंगे।

- तेजपाल सिंह, किसान महरौली

यदि जमीन का पूर्व में मुआवजा मिला होता, तो जमीन पर प्रशासन एवं लोक निर्माण का भौतिक कब्जा होता। अचानक सड़क बनाने से अधिकारियों की नीयत पर शक हुआ। विरोध किया। प्रोजेक्ट देश हित में है। उचित प्रतिकर मिलने पर जमीन सड़क निर्माण के लिए देंगे।

- यशवीर चौधरी, किसान महरौली

महरौली के खसरा संख्या-1008,1063 और 1064 की जमीन का लोकनिर्माण विभाग ने पूर्व में कभी अधिग्रहण नहीं किया है। चार स्तर पर हुई जांच रिपोर्ट के बाद डीएम और मंडलायुक्त को पत्र भेजकर उक्त जमीन को किसानों से आपसी सहमति से शीघ्र क्रय अथवा अधिगृहित करने का अनुरोध किया है। यूपी गेट से डासना तक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के तहत हो रहे सड़क निर्माण के लिए इस जमीन की जरूरत है। एडीएम वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में गठित समिति जमीन की दरें तय करेगी।

- मुदित गर्ग, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ

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