सौहार्द की अनूठी मिसाल, मुस्लिम महिलाओं ने सिलाई के पैसों को राम मंदिर के लिए किया गुप्तदान

डिजाइनर मनीष त्रिपाठी ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बाद लगे लाकडाउन के चलते शहर से गांव की ओर लौट रहे लोगों को तो नहीं रोक पाए लेकिन गांवों में जाकर उन्हें वहीं रोजगार देने का जरूर प्रयास किया।

Sanjay PokhriyalThu, 17 Jun 2021 11:40 AM (IST)
धर्म और संप्रदाय की महिलाएं पूरी लगन और आस्था से जुटी हैं।

शाहनवाज अली, गाजियाबाद। रहीमा, रुख्सार और मीना नहीं, इन्हें कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा समझिए। रामलला और उनके भाइयों को जन्म देने वालीं उनकी धात्रियां तो ये जन्मों-जन्म नहीं बन सकेंगी, लेकिन जिस वात्सल्य और प्रेम के जिस खादी के कपड़े रहीमा, रुखसार और मीना की सिलाई मशीन से होकर गुजरे हैं उस अनुभूति में इनकी तिगडी लीन है...मग्न है...मुग्ध है...।

रामलला के लिए लोनी के टीला शहबाजपुर में दुर्गा स्वयं सहायता समूह की संचालिका कुवरपाली के साथ मिलकर करीब दो दर्जन महिलाएं कपड़ा सिलाई का काम करती हैं। इनमें रहीमा खातून, रुखसार और मीना मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हैं, जो अयोध्या में विराजमान रामलला के लिए पोशाक तैयार कर रही हैं। कुछ पोशाक तैयार कर रामलला को धारण कराने के लिए भेजा भी जा चुका है।

रहीमा, रुखसार और मीना ने लगन के साथ न सिर्फ प्रभु श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान के लिए पोशाक तैयार की। बल्कि, सिलाई से मिलने वाले पैसे को श्रीराम मंदिर के लिए गुप्त रूप से दान भी किया। इसे वह खुशकिस्मती मानती हैं कि उनके द्वारा सिलाई की गई पोशाक को रामलला को धारण कराया गया। अभी वह रामलला के लिए और भी पोशाक तैयार करने में जुटी हैं। पोशाक में खास खादी और सिल्क का कपड़ा, गोटा, हाथ की कढ़ाई, क्रिस्टल के साथ भक्ति और सेवाभाव से सिलाई।

जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि अयोध्या में श्री रामलला, सीता माता और लक्ष्मण के साथ हनुमान के लिए खादी निर्मित वस्त्र जिले के स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाए गए हैं। खादी पूरी तरह सात्विक हैं और इनका चलन भी पुराना है। मंदिर के अलावा दूसरे धार्मिक स्थलों व मजार पर चढ़ाई जाने वाली चादर भी खादी से तैयार कराई जा रही हैं। स्वयं सहायता समूह में हर वर्ग की महिलाएं एक साथ मिलकर काम कर रही हैं।

डिजाइनर मनीष त्रिपाठी ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बाद लगे लाकडाउन के चलते शहर से गांव की ओर लौट रहे लोगों को तो नहीं रोक पाए, लेकिन गांवों में जाकर उन्हें वहीं रोजगार देने का जरूर प्रयास किया। रामलला के लिए गाजियाबाद के स्वयं सहायता समूह ने पोशाक तैयार की, जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया था। अभी पोशाक तैयार की जा रही हैं। इनमें धर्म और संप्रदाय की महिलाएं पूरी लगन और आस्था से जुटी हैं।

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