देश-विदेश में यूपी का नाम रोशन करने वाले सागर को मिलेगा स्वामी विवेकानन्द यूथ अवार्ड

अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही सागर की फाइल फोटोः सौ. परिजन

सागर बताते हैं कि 19 साल की उम्र में उन्होंने सोचा कि उन्हें कोई ऐसा कार्य करना है जिससे समाज शहर प्रदेश और देश का नाम ऊंचा हो और वे युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बन सकें। उन्होंने पर्वतारोहण के लिए प्रशिक्षण लिया।

Mangal YadavThu, 07 Jan 2021 02:24 PM (IST)

गाजियाबाद [अभिषेक सिंह]। अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोही सागर कसाना को 12 जनवरी को स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर विवेकानन्द यूथ अवार्ड देकर सम्मानित किया जाएगा। उनको यह अवार्ड लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देंगे। सागर को अवार्ड देने का निर्णय शासन स्तरीय कमेटी ने लिया है। इसकी जानकारी युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल विभाग, गाजियाबाद को दी गई है। अब कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है।

28 नवंबर 1997 को जन्मे सागर कसाना मूलतः गाजियाबाद के स्कलपुरा लोनी के रहने वाले हैं। वर्तमान में वह राजनगर एक्सटेंशन में पिता अजब सिंह कसाना, मां मीला कसान, बड़ी बहन सोनम कसाना के साथ रहते हैं। स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुके सागर फिट इंडिया मूवमेंट, स्वच्छ्ता अभियान में भी महत्वपूर्व भूमिका अदा करते हैं। नगर निगम गाजियाबाद ने उनको स्वच्छ्ता अभियान का ब्रांड अंबेसडर भी बनाया है।

ऐसे शुरू हुआ पर्वतों को फतह करने का सफर

सागर बताते हैं कि 19 साल की उम्र में उन्होंने सोचा कि उन्हें कोई ऐसा कार्य करना है जिससे समाज, शहर, प्रदेश और देश का नाम ऊंचा हो और वे युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बन सकें। उन्होंने जानकारी की तो पता चला कि गाजियाबाद से कोई भी नौजवान एवरेस्ट पर नहीं गया है। बस इसी जानकारी ने उनके अंदर पर्वतारोहण का जुनून पैदा कर दिया। जिसके आगे ऊंचे- ऊंचे पर्वतों का कद छोटा होता चला गया । उन्होंने पर्वतारोहण के लिए प्रशिक्षण लिया और एक-एक कर देश विदेश में स्थित पर्वतों को फतह करने लगे।

इन पर्वतों को कर चुके हैं फतह

2016 में हिमाचल प्रदेश के सेतीदार पिक पर तिरंगा लहराकर युवाओं को प्रेरित किया। 2017 में लेह लद्दाख की दूसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट गोलाप कांगड़ी पर तिरंगा फहराकर नाम रोशन किया। 2018 में अरुणाचल प्रदेश के वर्जन पिक पर तिरंगा फहराकर बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। 2018 में यूरोप खण्ड की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस (रूस) पर तिरंगा फहराकर फिट इंडिया मूवमेंट और स्वच्छ्ता का सन्देश दुनिया को दिया। वह भारत के पहले पर्वतारोही बने, जिसने दोनों दिशाओं से एक बार मे पर्वत का शिखर फतह किया। 2018 में अफ्रीका खण्ड को सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहराकर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। 2019 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर स्वच्छ्ता का संदेश दिया। 2020 में उन्होंने नैनीताल में आयोजित अल्ट्रा वॉरियर के अंतर्गत आयोजित 50 किलोमीटर मैराथन में हिस्सा लिया और कांस्य पदक जीता।

मिल चुका है राष्ट्रीय स्तर का पुरुस्कार

राष्ट्रीय स्तर पर लखनऊ में जनवरी 2020 में आयोजित 23वां राष्ट्रीय युवा उत्सव में सागर कसाना को यूथ आइकॉन का खिताब देकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित किया था।

पिता ने बताया कि सागर ने किस तरह किया मुश्किलों का किया सामना

सागर  इन दिनों श्रीनगर के गुलमर्ग में स्कीइंग का कोर्स पूरा किया है। वह वहीं पर हैं, जल्द ही घर आएंगे। उनके पिता अजब सिंह कसाना बताते हैं कि सागर ने जोखिम भरा रास्ता चुनकर ये कामयाबी हासिल की है। प्रदेश और देश का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया।

 इस बीच बर्फीले तूफान कांटेदार बर्फ फिसलन, कम ऑक्सिजन, जंगली जानवरों का सामना करना पड़ा पर भारत की शान तिरंगा झंडा ने सागर का हौसला बरकरार रखा। जिसकी वजह से वह मंजिल तक पहुंच सके। जब अफ्रीका , रूस और माउंट एवरेस्ट पर सागर ने तिरंगा फहराकर विश्व में देश को गौरवान्वित किया है।

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