गाजियाबाद मतांतरण: कई दिन चली पूछताछ के बाद भी संदिग्धों ने नहीं खोली जुबान, गहराया रहस्य

मसूरी थाना क्षेत्र के डासना देवी मंदिर में दो जून की रात घुसे दो संदिग्धों विपुल विजयवर्गीय उर्फ रमजान कासिफ व उन्हें मंदिर में भेजने वाले विजयनगर निवासी सलीमुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद मतांतरण कराने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ और देश भर में कई गिरफ्तारियां हुई।

Vinay Kumar TiwariTue, 06 Jul 2021 03:20 PM (IST)
संदिग्धों के मंदिर में घुसने के उद्देश्य का पता नहीं लगा पाईं पुलिस व एजेंसियां

गाजियाबाद, [आशुतोष गुप्ता]। मसूरी थाना क्षेत्र के डासना देवी मंदिर में दो जून की रात घुसे दो संदिग्धों विपुल विजयवर्गीय उर्फ रमजान, कासिफ व उन्हें मंदिर में भेजने वाले विजयनगर निवासी सलीमुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद मतांतरण कराने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ और देश भर में कई गिरफ्तारियां हुई। गिरफ्तारियों के बाद कई सनसनीखेज जानकारियां निकलकर आई। इस खेल में विदेशी फंडिंग का राज खुलने के साथ हजारों की संख्या में मतांतरण से भी पर्दा उठा। लेकिन एजेंसियों व पुलिस ने जहां से शुरुआत की थी, उस बिंदू की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी संदिग्धों के मंदिर में घुसने का उद्देश्य अभी तक पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां नहीं उजागर कर सकी हैं। इनके मंदिर में घुसने का रहस्य गहराता जा रहा है। ऐसे कई सवाल है जो अभी तक अनसुलझे हैं। इन सवालों के जवाब बड़ी साजिश से पर्दा उठा सकते हैं। हालांकि सलीमुद्दीन को पूर्व में ही कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल चुकी है जबकि विपुल व कासिफ अब तक जेल में ही हैं, उनकी सुनवाई के लिए कोर्ट ने नौ जुलाई की तारीख नियत की है।

साफ नीयत से नहीं घुसे थे मंदिर में

साफ नीयत से नहीं घुसे थे मंदिर में विपुल विजयवर्गीय व कासिफ के मंदिर में घुसने का मकसद भले ही साफ नहीं है लेकिन करीब 10 दिन तक इनसे चली पूछताछ में यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों के मंदिर में घुसने की नीयत साफ नहीं थी और सलीमुद्दीन के उकसाने पर ही वह मंदिर में घुसे थे।

बैग में लोहे के स्केल मिलने से और संदिग्ध हुआ था मामला

पुलिस ने जब आरोपितों को गिरफ्तार किया तो उनके बैग से तीन सर्जिकल ब्लेड, वेक्यूम थैरेपी में काम आने वाली वेक्यूम सेक्शन मशीन, कुछ दवाएं, धार्मिक किताबें और दो लोहे के स्केल बरामद हुए थे। पुलिस ने लोहे के स्केल पर अधिक ध्यान नहीं दिया था लेकिन जब एक खुफिया एजेंसी की पूछताछ में स्केल की बात सामने आई तो मामला अधिक संदिग्ध हो गया। दरअसल सूत्रों का कहना था कि इन स्केल का इस्तेमाल गला काटने में किया जा सकता है। सर्जिकल ब्लेड से गले में कट देने के बाद स्केल को इस कट पर लगाकर दबाव देने से गले को पूरी तरह से काटा जा सकता है।

इन सवालों का जवाब मिलने पर बड़ी साजिश से उठेगा पर्दा

- मंदिर के गेट पर बोर्ड लगा है कि यहां मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है, इसके बाद भी आरोपित मंदिर में क्यों गए?

- पुलिसकर्मियों ने कहा कि महंत यति नरसिंहानंद मंदिर में नहीं है, इसके बाद भी वह मंदिर में क्यों घुसे?

- विपुल ने रजिस्टर में अपनी एंट्री तो सही नाम से की लेकिन कासिफ का नाम काशी गुप्ता क्यों लिखा?

- 27 मई से विपुल विजयवर्गीय गाजियाबाद था, वह दिन में मंदिर में क्यों नहीं आया, मंदिर में आने के लिए रात का समय ही क्यों चुना?

- छह घंटे तक वह किताब की दुकान पर क्यों रुके रहे, आखिर शाम होने का इंतजार वह क्यों कर रहे थे?

- वह मंदिर परिसर में तब ही क्यों घुसे जब महंत यति नरसिंहानंद पूजा-पाठ में तल्लीन होते हैं? और बिना सुरक्षा के होते हैं?

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