कार एजेंसी का मालिक बन खाते में सेंधमारी, पुलिस ने नौ लोगों को किया गिरफ्तार

आरोपित कार व बाइक एजेंसियों के मालिक बनकर उनके खाते में सेंधमारी करते थे।

सीओ प्रथम ने बताया कि ट्रांजेक्शन पुष्पेंद्र की फर्म (गाड़ियों की एजेंसी) से हुई हैं। कैश क्रेडिट खातों से बैंक अधिकारी खाताधारक की आधिकारिक ई-मेल आइडी से मेल किए जाने और पंजीकृत मोबाइल नंबर से काल आने पर दूसरे खातों में रकम ट्रांसफर कर देते हैं।

Publish Date:Tue, 29 Dec 2020 08:24 PM (IST) Author: Prateek Kumar

गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। नगर कोतवाली पुलिस ने एक और फर्जी काल सेंटर का भंडाफोड़ कर नौ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों से बड़ी संख्या में डेबिट कार्ड व फर्जी पैन कार्ड, आधार व वोटर आइ कार्ड बरामद हुए हैं। आरोपित कार व बाइक एजेंसियों के मालिक बनकर उनके खाते में सेंधमारी करते थे। आरोपितों ने इसी माह गाजियाबाद के व्यापारी के खाते से करीब 16 लाख रुपये की ठगी की थी। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। 

गिरोह का सरगना है विनय यादव 

एसपी सिटी प्रथम अभिषेक वर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित फरीदाबाद के खेड़ीपुल थानाक्षेत्र निवासी पुनीत कुमार उर्फ डंपी उर्फ गजेंद्र व पल्ला निवासी विशाल शर्मा उर्फ काचु, लोनी निवासी विनय यादव उर्फ बब्लू, बंगाल के हुगली में मोगरा निवासी मुन्ना साहू, बिहार के सिवान निवासी पवन मांझी व ब्रजमोहन, मथुरा के सुरीर निवासी कपिल, हाथरस के सादाबाद निवासी चेतन और खोड़ा निवासी अफसर अली हैं। गिरोह का सरगना विनय यादव है। 

भाजपा विधायक के भाई के खाते से उड़ाए पैसे

आरोपितों ने सात दिसंबर को गढ़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रहे राम नरेश रावत के भाई राजनगर निवासी पुष्पेंद्र रावत के पीएनबी खाते से 8,56,300 रुपये विश्वनाथ के आइसीआइसीआइ बैंक खाते में और 7,35,600 रुपये सुधीर के कोटक महिंद्रा बैंक के खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। 

ऐसे की ठगी

सीओ प्रथम अभय कुमार मिश्र ने बताया कि दोनों ट्रांजेक्शन पुष्पेंद्र की फर्म मांगेराम एंटरप्राइजेज के कैश क्रेडिट खाते से किए गए थे। वह हुंडई की गाड़ियों की एजेंसी चलाते हैं। कैश क्रेडिट खातों से बैंक अधिकारी खाताधारक की आधिकारिक ई-मेल आइडी से मेल किए जाने और पंजीकृत मोबाइल नंबर से काल आने पर दूसरे खातों में रकम ट्रांसफर कर देते हैं। इसी का फायदा उठाते हुए पुष्पेंद्र रावत की ईमेल आइडी से मिलती-जुलती ईमेल आइडी बनाकर शाखा प्रबंधक को ईमेल भेजी गई थी। साथ ही उनके नाम पर अनजान नंबर से काल भी की गई थी। इस तरह धोखाधड़ी़ कर दोनों ट्रांजेक्शन कराए गए।

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