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न्याय के लिए आरटीआइ को बनाया हथियार

सूचना का अधिकार: तंत्र के गण

फोटो 21 जीपीएस 6

- आरटीआइ से जानकारी हासिल कर पर्यावरण संरक्षण के लिए एनजीटी में डाल चुके कई केस

धनंजय वर्मा, साहिबाबाद :

कड़कड़ मॉडल निवासी 36 वर्षीय सुशील राघव सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 को हथियार बनाकर गरीबों और शोषितों को न्याय दिलाने का काम कर रहे हैं। वह दर्जनों लोगों को आरटीआइ के माध्यम से न्याय के साथ आर्थिक मदद भी दिला चुके हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आरटीआइ को रास्ता बना लिया है।

गाजियाबाद के साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-चार स्थित कड़कड़ मॉडल गांव के रहने वाले सुशील राघव ने एमएससी तक पढ़ाई की है। पढ़ाई के बाद उन्होंने कुछ साल मीडिया इंडस्ट्री में नौकरी की। इसके बाद वह अपना काम करने लगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 2007 से आरटीआइ डालना शुरू किया। पहली आरटीआइ उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लगाई। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए भटक रहे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरटीआइ को हथियार बनाकर न्याय दिलाने का काम शुरू किया।

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डॉक्टरों की लापरवाही से मौत, दिलाया मुआवजा

सुशील ने बताया कि कुछ वर्ष पहले दिल्ली के एक अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से एक महिला की मौत हो गई। पूरा परिवार परेशान था। महिला का बेटा उन्हें मिला। उन्होंने आरटीआइ डाली तो अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई। इसके बाद उन्होंने अस्पताल पर केस कर दिया। बाद में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने मृतक महिला के बच्चों को सवा पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया। इतना ही नहीं खोड़ा में एक परिवार में करंट लगने से पिता और बेटे की मौत हो गई। परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। पिता-पुत्र को करंट लगने में विद्युत निगम की लापरवाही थी। उन्होंने आरटीआइ के जरिये परिवार को आर्थिक मदद दिलाई। इतना ही नहीं आरटीआइ का जवाब न देने पर वह कई संस्थाओं पर जुर्माना भी लगवा चुके हैं।

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अमेरिका में उत्पीड़न, भारत में दर्ज कराया केस :

उत्तराखंड के ऋषिकेश की रहने वाली महिला अपने पति के साथ अमेरिका चली गई। वहां पर महिला के साथ उसका पति मारपीट करने लगा। आरोपित पति ने महिला का बच्चा भी बेच दिया। महिला ने अमेरिका में शिकायत की, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। भारत आने के बात महिला सुशील राघव से मिली। सुशील राघव ने बताया कि उन्होंने भारतीय दूतावास में आरटीआइ डाली, जिसमें जानकारी मांगी गई कि अमेरिका में महिला ने भारतीय दूतावास में शिकायत की थी उस पर क्या-क्या कार्रवाई हुई, जितनी भी कार्रवाई की गई थी उसकी लिखित में जानकारी मिली। इसके बाद उन दस्तावेजों के आधार पर महिला ने ऋषिकेश में रिपोर्ट दर्ज कराई।

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पर्यावरण बचाने के लिए आरटीआइ को बनाया रास्ता

सुशील राघव ने आरटीआइ से जानकारी हासिल की कि नोएडा और गाजियाबाद से यमुना नदी में हर रोज एक हजार मिलियन लीटर गंदा पानी यमुना में डाला जाता है। इससे यमुना का पानी दूषित हो रहा है। इतना ही नहीं यह पानी मथुरा के कई कुंड में जाता है, जिसे लोग पीते हैं, इससे लोगों की सेहत बिगड़ सकती है। उन्होंने आरटीआइ के माध्यम से विभिन्न जानकारियां जुटाईं और अब एनजीटी में भी केस लड़ रहे हैं।

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