बच्चों से ही हो पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत

स्कूल सीखने का केंद्र है और बच्चों को शिक्षित करने के लिए एक संस्था है। यह कहना उचित होगा कि हमारे भविष्य के नेताओं को शिक्षित करने की जिम्मेदारी स्कूलों की है। हमें उन्हें आने वाले कल के लिए तैयार करना है इसीलिए उन्हें कम उम्र से ही पर्यावरण के प्रति जागरूक करना चाहिए। पर्यावरण संबंधी चुनौतियां अपेक्षा से अधिक तेजी से सामने आ रही हैं। इसीलिए हर जागरूक संस्था पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संरक्षण प्रयासों में अधिक शामिल होने का आह्वान कर रही हैं। लोग जितनी जल्दी पर्यावरण के बारे में जानेंगे उतनी ही जल्दी वे इसे सुरक्षित रखने में अपना योगदान दे सकेंगे।

JagranWed, 20 Oct 2021 10:14 PM (IST)
बच्चों से ही हो पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत

स्कूल सीखने का केंद्र है और बच्चों को शिक्षित करने के लिए एक संस्था है। यह कहना उचित होगा कि हमारे भविष्य के नेताओं को शिक्षित करने की जिम्मेदारी स्कूलों की है। हमें उन्हें आने वाले कल के लिए तैयार करना है, इसीलिए उन्हें कम उम्र से ही पर्यावरण के प्रति जागरूक करना चाहिए। पर्यावरण संबंधी चुनौतियां अपेक्षा से अधिक तेजी से सामने आ रही हैं। इसीलिए हर जागरूक संस्था पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संरक्षण प्रयासों में अधिक शामिल होने का आह्वान कर रही हैं। लोग जितनी जल्दी पर्यावरण के बारे में जानेंगे, उतनी ही जल्दी वे इसे सुरक्षित रखने में अपना योगदान दे सकेंगे।

लोगों की कही बातों के बजाय हम उन चीजों को याद रखने की अधिक संभावना रखते हैं, जो लोगों ने की हों। यद्यपि बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का अर्थ के बारे में पढ़ाना महत्वपूर्ण है। यह न केवल पर्यावरण जागरूकता को प्रोत्साहित करेगा। बल्कि उन्हें यह भी सिखाएगा कि पर्यावरण के प्रति जागरूक व्यवहार को कैसे जीना है। इसलिए, जब आप कूड़े को देखें, तो उसे उठाकर सही जगह फेंकें। भले ही वह आपका न हो। आप नहीं जानते कि कौन आपको देख सकता है और आपसे सीख सकता है तो सीखने और सिखाने को सदैव तत्पर रहें। यदि शिक्षार्थी अपने पर्यावरण ज्ञान को अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करते हैं तो वे व्यापक समुदाय को लाभान्वित कर सकते हैं।

ऐसा करने का एक अच्छा तरीका बच्चों को घर पर स्कूल में सीखी गई बातों का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उदाहरण के लिए, पानी का संयम से उपयोग करना और घर पर टपकने वाले नलों को बंद करने का अभ्यास छात्र को करना चाहिए। यह ²ष्टिकोण बच्चों को एक वास्तविक दुनिया का संदर्भ देगा कि पर्यावरण जागरूकता क्यों मायने रखती है। समुदायों को पर्यावरण संबंधी चिताओं को दूर करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

पर्यावरण का संरक्षण करेंगे, तो आने वाली पीढि़यां स्वस्थ जीवन जीने में सक्षम होंगी। हरित जीवनशैली का नेतृत्व करने के लिए आप चाहे कितना भी छोटा कदम उठा लें, वह बड़ा परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है। हम अपने विद्यालय में अपने विद्यार्थियों को जीवन की यही शैली अपनाने के लिए जागरूक करने का प्रयास निरंतर करते रहते हैं। यदि हर विद्यालय यह जिम्मेदारी उठा लें तो आधी से ज्यादा मुश्किल आसानी से हल हो जाएगी और अपने आने वाले कल को सुरक्षित बनाने में जरूर कामयाब होंगे। - आशा किरन, प्रधानाचार्या, वरदान इंटरनेशनल स्कूल, सेवा नगर।

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