जेईई एडवांस में 261 रैंक हासिल कर अर्जुन जिले में शीर्ष पर

जागरण संवाददाता गाजियाबाद अपनी प्रतिभा पर अपनी मेहनत पर कभी शक नहीं करना चाहिए। परीक्षा चाहें कोई भी हो पूरे आत्मविश्वास के साथ दें। इससे कम से कम आप जितना जानते हैं जितना सीखा है उतना अच्छे से पेपर में कर पाएंगे। तनावमुक्त रहने की कोशिश करनी चाहिए। यह कहना है इंदिरापुरम के रहने वाले कुमार अर्जुन का जो जेईई एडवांस में 261 रैंक हासिल कर जिले में शीर्ष स्थान पर हैं। जेईई मेंस में उनकी रैंक 247 थी।

JagranSat, 16 Oct 2021 08:26 PM (IST)
जेईई एडवांस में 261 रैंक हासिल कर अर्जुन जिले में शीर्ष पर

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : अपनी प्रतिभा पर, अपनी मेहनत पर कभी शक नहीं करना चाहिए। परीक्षा चाहें कोई भी हो पूरे आत्मविश्वास के साथ दें। इससे कम से कम आप जितना जानते हैं, जितना सीखा है उतना अच्छे से पेपर में कर पाएंगे। तनावमुक्त रहने की कोशिश करनी चाहिए। यह कहना है इंदिरापुरम के रहने वाले कुमार अर्जुन का, जो जेईई एडवांस में 261 रैंक हासिल कर जिले में शीर्ष स्थान पर हैं। जेईई मेंस में उनकी रैंक 247 थी।

कुमार अर्जुन के पिता कुमार मनोज इंजीनियर और मां अर्चना कुमार गृहिणी हैं। डीपीएस इंदिरापुरम से उन्होंने 10वीं में 97.6 फीसद और 12वीं में 98 फीसद अंक पाए थे। कक्षा नौ से उन्होंने फिट-जी के पूर्वी दिल्ली स्थित संस्थान से कोचिग शुरू की थी। पढ़ाई के साथ कुमार अर्जुन को खेल में भी रुचि है। वह ताइक्वांडो के नेशनल चैंपियन रहे हैं। इसके अलावा उन्हें गिटार बजाने का शौक है। कुमार अर्जुन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके पसंदीदा संस्थान आइआइटी खड़गपुर में दाखिला मिल जाएगा। वह कंप्यूटर साइंस से आइआइटी करने के बाद रिसर्च के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। वह महान विज्ञानी सीवी रमन को अपना आदर्श मानते हैं और उनके पदचिह्नों पर चलते हुए शोध करना चाहते हैं। आफलाइन पढ़ाई करना बेहतर : कुमार अर्जुन का कहना है कि जितना हो सके उतना आफलाइन पढ़ाई करना ज्यादा बेहतर है। हालांकि कोविड के दौरान उन्होंने भी आनलाइन पढ़ाई की, लेकिन वह तैयारी के दौरान इंटरनेट मीडिया से पूरी तरह से दूर रहे। आफलाइन पढ़ाई में पूरा फोकस पढ़ाई पर होता है। हर दिन अपने सिलेबस के छोटे-छोटे लक्ष्य तय कर उन्हें पूरा किया। हर रोज 10-12 घंटे पढ़ाई की। स्कूल और कोचिग में जो पढ़ाया उतने सिलेबस को साथ के साथ पूरा किया। सफलता का श्रेय उन्होंने अपने स्वजन और शिक्षकों को दिया।

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