चूड़ी जुड़ाई मजदूरों ने किया कार्य बहिष्कार, नारेबाजी

सेवायोजक द्वारा निर्धारित से कम मजदूरी देने पर भड़का आक्रोश काफी देर करते रहे हंगामा पुलिस ने समझा-बुझाकर भेजा वापस।

JagranSat, 19 Jun 2021 06:37 AM (IST)
चूड़ी जुड़ाई मजदूरों ने किया कार्य बहिष्कार, नारेबाजी

जागरण संवाददाता, फीरोजाबाद : चूड़ी जुड़ाई के लिए निर्धारित से कम मजदूरी मिलने पर शुक्रवार को जुड़ाई मजदूरों ने संघर्ष की राह पकड़ ली। सेवायोजकों की मनमानी के खिलाफ मजदूरों ने कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया। उन्होंने कारखाने के बाहर आकर हंगामा, नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने चेतावनी दी कि शासनादेश के मुताबिक निर्धारित मजदूरी नहीं दी गई तो अनिश्चित कालीन हड़ताल करेंगे।

सरकार ने भले ही चूड़ी जुड़ाई श्रमिकों के लिए तीन हजार रुपये प्रति सौ तोड़ा की दर से न्यूनतम मजदूरी निर्धारित कर दी है, लेकिन सेवायोजकों द्वारा पूर्व निर्धारित 2400 रुपये की दर में भी कटौती की जा रही है। इसको लेकर जुड़ाई मजदूरों में पिछले कई दिनों से आक्रोश पनप रहा है। शुक्रवार को मिलेनियम ग्लास के चूड़ी जुड़ाई मजदूरों ने कार्य बहिष्कार कर ऐलान कर दिया। कारखाने के बाहर दो घंटे तक हंगामा नारेबाजी करते रहे। मजदूरों का कहना है कि चूड़ी जुड़ाई के लिए 72 रुपये प्रति लीटर मिट्टी का तेल मिल रहा है। गैस सिलेंडर भी 900 रुपये का आ रहा है। इसके बावजूद सेवायोजकों द्वारा 2400 रुपये प्रति सौ तोड़ा की दर से मिलने वाली मजदूरों में भी कटौती की जा रही है। पिछले कई दिनों से कभी 2000 तो कभी 2200 की दर से मजदूरी दी जा रही है। हमारी मांग है कि शासन द्वारा निर्धारित 3000 रुपये प्रति सौ तोड़ा की दर से मजदूरी दी जाए। हंगामे की सूचना पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचा। उन्होंने मजदूरों को समझा-बुझाकर वापस भेजा।

- न्याय न मिलने तक लड़ेंगे मजदूरों की लड़ाई : जुड़ाई मजदूरों की हड़ताल होने पर श्रमिक नेता रामदास मानव मौके पर पहुंचे। उन्होंने मजदूरों की समस्या सुनी। उनका कहना है कि सेवायोजकों द्वारा पहले से निर्धारित मजदूरी में कटौती की जा रही है, जिससे श्रमिकों में काफी आक्रोश है। शासनादेश के मुताबिक न्यूनतम मजदूरी देने के संबध में दो दिन पहले डीएम को ज्ञापन दिया गया है। न्याय न मिलने तक जुड़ाई मजदूरों की लड़ाई लड़ते रहेंगे। - चूड़ी जुड़ाई के पिछले भुगतान को लेकर कुछ विवाद था। इसकी सूचना पर लेबर इंस्पेक्टर को भेजा गया था। सेवायोजक ने श्रमिकों की बात मान ली, जिसके बाद फैक्ट्री में काम शुरू हो गया था।

- अरुण कुमार सिंह, एएलसी

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