36 की नाप और 32 के स्वेटर, नहीं रोक पा रहे ठंड

जासं, फीरोजाबाद : प्राथमिक स्कूल कन्या लेबर कॉलोनी में पढ़ने वाली कक्षा चार की छात्रा बेबी ऊंचा स्वेटर पहने बैठी थी। छात्रा को 36 नंबर साइज का स्वेटर मिलना था, लेकिन उसे 32 नंबर का मिला है। तीसरी कक्षा के अनस, पांचवी के शहराम, रुखसार, मंतसा की सुनिए। इनका नाप 36 का लिया गया था, लेकिन स्वेटर मिला 40 नंबर का। वहीं जिले में 23 हजार से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं, जिनके पास अब तक सरकार के स्वेटर ही नहीं पहुंचे। सर्दी एक्सप्रेस आ गई, लेकिन सरकार की स्वेटर एक्सप्रेस पटरी से उतरी है। जूतों के बाद अब स्वेटर की सुविधा भी बदइंतजामी के सवालों के घेरे में है।

प्रत्येक वर्ष सरकार द्वारा परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को स्वेटर उपलब्ध कराए जाते हैं। इस बार स्वेटर का ठेका दिल्ली की मलिक इंटरप्राइजेज कंपनी को दिया गया। 30 नवंबर तक हर बच्चे के पास स्वेटर पहुंचना चाहिए था। टीम जागरण ने जब इसकी हकीकत की पड़ताल की तो तस्वीर चौंकाने वाली रही। दोपहर शहर के लेबर कॉलोनी स्थित प्राथमिक स्कूल बालक में दूसरी कक्षा के अरमान को 30 नंबर की जगह 34 का स्वेटर मिलता था। वहीं पांचवीं के कन्हैया, जुवैद सहित आधा दर्जन से अधिक छात्र स्वेटर का अब भी इंतजार कर रहे हैं। उच्च प्राथमिक स्कूल रहना में 265 छात्र-छात्राएं पंजीकृत है, लेकिन 226 को ही स्वेटर मिल सके हैं।

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कहीं मोटा तो कहीं पतला स्वेटर

इस बार वितरित किए गए स्वेटरों में काफी झोल है। किसी बच्चे को मोटा तो किसी को पतला स्वेटर उपलब्ध कराया गया है। बच्चों का कहना था कि अभी दो सप्ताह पहले ही स्वेटर मिला था, लेकिन अभी से रूआं देने लगे हैं। स्वेटरों में सर्दी लगती है।

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पिछले वर्ष स्कूल प्रबंध समिति ने की थी खरीदारी

शैक्षिक सत्र 2018-19 तक प्रत्येक स्कूल की प्रबंध समिति द्वारा स्वेटर खरीदे गए थे। इसके लिए सरकार ने प्रत्येक बच्चे की दर से दो सौ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। कार्रवाई के डर से स्वेटर की गुणवत्ता भी ठीक रही।

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छात्रों-छात्राओं की कुल संख्या - 1,68,850

अब तक बांटे गए स्वेटर- 1,45,000

बचे हुए छात्र-छात्राओं की संख्या-23,850

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स्कूलों में साइज के हिसाब से स्वेटर वितरण नहीं होने की शिकायतें मिल रही हैं। इस संबंध में बीएसए को निर्देश दिए है कि स्वेटर वापस कराकर साइज के हिसाब से ही छात्र-छात्राओं को स्वेटर उपलब्ध कराएं जाएं।

अवध किशोर, अपर निदेशक बेसिक शिक्षा आगरा

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