अस्पताल की सेवाएं बदहाल, कागजों में सब दुरुस्त

संवाद सूत्र हथगाम न्यू पीएचसी इटैली में मरीजों को ओपीडी की सेवाएं तो जैसे-तैसे मिल जाती है

JagranSat, 19 Jun 2021 06:46 PM (IST)
अस्पताल की सेवाएं बदहाल, कागजों में सब दुरुस्त

संवाद सूत्र, हथगाम : न्यू पीएचसी इटैली में मरीजों को ओपीडी की सेवाएं तो जैसे-तैसे मिल जाती हैं, लेकिन मरीजों को भर्ती करने का काम बंद है। दो माह बीत गए हैं, यहां तैनात चिकित्सक नहीं आए, यह बात अलग है कि उनकी ड्यूटी रजिस्टर में बदस्तूर जारी है। ऐसे में मरीजों का विश्वास अस्पताल से उठता जा रहा है। ओपीडी के अलावा यहां बाकी स्वास्थ्य सेवाओं की खातिर मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। चिकित्सक की गैर मौजूदगी में फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वाय ही अस्पताल का संचालन करते हैं।

न्यू पीएचसी में यूं तो जरूरी स्टाफ की तैनाती की गई है। अस्पताल के लिहाज से सफाई बेहद जरूरी है। इस दिशा में विभाग की ओर से ध्यान नहीं दिया जाता है। अस्पताल में सफाई कर्मी/स्वीपर की तैनाती न होने से चारों ओर गंदगी पसरी रहती है। वार्ड के अंदर चारों ओर गंदगी होने से यहां भर्ती होने के लिए मरीज तैयार नहीं होते हैं। यदा-कदा ही मरीजों को अस्पताल में भर्ती करके उनका इलाज किया जाता है। अधिकांश दिनों में दोपहर दो बजे के बाद ताला लटक जाता है। अस्पताल में औसतन 35-40 मरीज प्रतिदिन आते हैं। हथगाम सीएचसी के अधीक्षक अमित चौरसिया का इस अस्पताल पर नियंत्रण हैं। प्राथमिक उपचार की जरूरी दवाएं मौजूद रहती हैं। इमरजेंसी दवाओं के लिए मरीजों को जरूर परेशानी उठानी पड़ती है। अस्पताल में दवाओं की अनुपलब्धता के चलते मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदकर काम चलाना पड़ता है। स्वीपर व सफाई कर्मी न होने के कारण यहां पर निजी मजदूर लगाकर सफाई कराई जाती है। नियमित सफाई न होने से अस्पताल के अंदर से ही संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। स्वीपर की तैनाती के लिए कई बार लिखा गया पत्र

न्यू पीएचसी के डा. शैलेंद्र कुमार विश्वकर्मा के अलावा फार्मासिस्ट धर्मेंद्र कुमार पाल, आयुष फार्मासिस्ट कैलाश मौर्य, वार्ड ब्वाय शिवाकांत, एएनएम ऊषा गुप्ता की तैनाती की गई है। सफाई कर्मी/स्वीपर की तैनाती के लिए कई बार यहां के स्टाफ ने चिकित्सा अधीक्षक हथगाम को पत्राचार किया। जिला मुख्यालय में मांग पत्र भेजने के बाद स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हो सका। जनरेटर की व्यवस्था न होने से शाम ढलते ही अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब जाता है। इनवर्टर के सहारे ही रात्रिकालीन स्वास्थ्य सेवाएं तथा प्रसव होते हैं। दो महीने नहीं हुए चिकित्सक के दर्शन

बीते अप्रैल व मई महीने में अस्पताल आने वाले मरीजों को चिकित्सक नहीं मिले। बताते हैं कोरोना हास्पिटल में डाक्टर की तैनाती किए जाने की वजह से क्षेत्र के मरीजों को समस्या उठानी पड़ी। जबकि न्यू पीएचसी में में दंदवा, पट्टीशाह, मंगरेमऊ, हरी का पुरवा, सुक्खा का पुरवा, अखरीपर, गाजीपुर खुर्द, अजतूपुर, सरौली, चक इटैली, गोकुलपुर, कसेरूवा, कूंधन, डगडगी आदि गांवों से मरीज आते हैं। अस्पताल की कहानी ग्रामीणों की जुबानी

ओपीडी में सेवाएं मिल जाती थी, लेकिन अप्रैल व मई महीने में चिकित्सक की गैर मौजूदगी में फार्मासिस्ट ने उपचार किया। बिना डाक्टर उपचार में संकट है।

शिवनारायण गुप्त, इटैली अस्पताल में दवाएं मौजूद होने के बाद अक्सर ही बाहर से लिखी जाती है। दवाओं के मामले में थोड़ा और सुधार किए जाने की आवश्यकता है, ताकि आम व्यक्ति को सुविधा मिल सके।

उत्तम कुमार, इटैली चिकित्सक की तैनाती पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। महिला चिकित्सक या फिर स्टाफ नर्स की तैनाती न होने मरीज बाहर ले जाने पड़ते हैं। इसमें सुधार होना चाहिए।

बचन लाल, कसेरूवा अस्पताल में सफाई व्यवस्था खराब है। एक प्राइवेट दाई को बुलाकर सफाई करा ली जाती है। नियमित रूप से अस्पताल को साफ रखने का बंदोबस्त होना चाहिए।

दिवाकर पांडेय, दंदवा इटैली पीएचसी की गिनती अच्छे अस्पताल हैं, लेकिन अगर यहां सेवाएं प्रभावित हैं तो जिम्मेदारों से इसका जवाब लिया जाएगा। यहां की कमियां दूर कराई जाएंगी।

डा. गोपाल माहेश्वरी, सीएमओ

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