जीटी रोड पर लगेंगे स्पीड सेंसर, चालान पहुंचेगा घर

जीटी रोड पर लगेंगे स्पीड सेंसर, चालान पहुंचेगा घर

में स्पीड सेंसर लगाए जाएंगे। वाहन की गति सीमा से अधिक होने पर यह वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर चालान काट देगा और ऑनलाइन ही वाहन स्वामी के मोबाइल पर भेज देगा। इससे काफी हद तक हादसों पर ब्रेक लगेगा

Publish Date:Fri, 27 Nov 2020 10:48 PM (IST) Author: Jagran

प्रशांत कुमार, कन्नौज:

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 91 यानी मुगलकालीन ऐतिहासिक जीटी रोड (अलीगढ़-कानपुर) छह लेन होने के बाद यात्रियों को एक्सप्रेस-वे जैसी सुविधाएं मिलेंगी। तेज रफ्तार के कारण हादसों को रोकने को स्पीड सेंसर लगेंगे। निर्धारित 100 किमी प्रति घंटा की गति सीमा से अधिक वाहन दौड़ाने पर चालान सीधे वाहन स्वामी के घर पहुंचेगा। एक सप्ताह के अंदर जुर्माना राशि भी जमा करनी होगी।

ऐतिहासिक जीटी रोड के चौड़ीकरण का काम फिलहाल चल रहा है। अलीगढ़ से नबीगंज तक करीब 80 फीसद काम पूरा हो चुका है, जबकि कन्नौज में 65 किमी में समतलीकरण का काम तेज है। अलीगढ़ से कानपुर के आइआइटी गेट तक जीटी रोड को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के इंजीनियर नवीन कुमार के मुताबिक, जीटी रोड को एक्सप्रेस-वे की तरह उच्च सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। हादसों को रोकने के लिए सभी प्रतिरोधक उपाय रहेंगे। इसके लिए कम से कम कट दिए जाएंगे। लिंक रोडों को जोड़ने के लिए दोनों तरफ सर्विस लेन और अंडर पास बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय वाहनों को पास करने में दिक्कत नहीं हो। हादसे रोकने के लिए चेतावनी बोर्ड की अनदेखी करने के कारण प्रत्येक 20 किमी के अंतराल में स्पीड सेंसर लगेंगे। वाहन की गति 100 किमी प्रति घंटा की सीमा से अधिक होने पर सेंसर रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर चालान काट देगा और ऑनलाइन ही वाहन स्वामी के मोबाइल पर भेज देगा। जुर्माना राशि भविष्य सरकार तय करेगी। कई बार ऐसा होने पर निर्धारित नियमों के आधार पर कार्रवाई होगी।

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मिलेंगी ये सुविधाएं

- इमरजेंसी हेल्पलाइन व एंबुलेंस सेवा

- सुरक्षा के लिए हाईवे पेट्रोलिंग।

- पेट्रोल पंप, शौचालय, हवा-पानी।

- होटल, मोटेल व रेस्टोरेंट।

- टोल प्लाजा व पब्लिक कॉल आफिस

- फास्टैग व स्मार्ट कार्ड सुविधा।

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अलीगढ़ से कानपुर तक जीटी रोड को विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त बनाया जाएगा। स्पीड सेंसर लगने से वाहनों की गति पर नियंत्रण रहेगा। इससे हादसे कम होंगे। सभी कंपनियों को टेंडर दे दिए गए हैं। जल्द ही काम शुरू होगा।

-गौरव गुप्ता, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ।

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