भइया! बाढ़ ने तबाह कर दी सैकड़ों एकड़ भूमि पर खड़ी फसल

जागरण संवाददाता फर्रुखाबाद कार्तिक का महीना आते ही हर किसी के मन में दीपावली की उमंग

JagranWed, 27 Oct 2021 10:44 PM (IST)
भइया! बाढ़ ने तबाह कर दी सैकड़ों एकड़ भूमि पर खड़ी फसल

जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : कार्तिक का महीना आते ही हर किसी के मन में दीपावली की उमंग जागती है, लेकिन गंगा और रामगंगा के तटवर्ती गांवों में बसे क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों की यह उमंग बाढ़ का पानी अपने साथ बहा ले गया। गंगा और रामगंगा की ठांठे मारती बाढ़ ने अमृतपुर, सदर व कायमगंज तहसील के दर्जनों गांवों में तबाही और बेबसी का वह मंजर लिखा है, जिसे भूलना मुश्किल होगा। गंगा में बाढ़ के चौथे दिन बुधवार को पानी तो कुछ कम हुआ, लेकिन कटरी क्षेत्र में इस कदर तबाही हुई है कि साधन संपन्न ग्रामीणों का भी धैर्य जवाब दे गया है। कई गांवों तक पहुंचने के रास्ते भी कट गए हैं।

जागरण टीम ने बुधवार को मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव में जाकर हाल जाना तो ग्रामीणों ने अपनी तकलीफ बयान की। गांव बिलाबलपुर निवासी अमर सिंह पाल से बाढ़ के बारे में पूछा तो बोले कि वर्ष 2010 के बाद इस बार ऐसी बाढ़ आयी है। इससे पूर्व वर्ष 1978 में भी एक बार ऐसी ही भयावह बाढ़ आई थी, लेकिन उसकी यादें अब धुंधली पड़ चुकी हैं। सैकड़ों बीघा फसल बरबाद हो गई। बाढ़ चौकी में भी पानी भर गया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच दिनों से बिजली भी कटी हुई है। उन्होंने बताया कि कमजोर वर्ग के पास तो खाने को कुछ भी नहीं बचा। मदद तो दूर कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी हाल तक लेने नहीं आया। गांव भिड़ौर निवासी जोगराम वर्मा बोले कि उन्होंने 25 बीघा में आलू बोया था। गांव में अन्य लोगों ने भी आलू की बुवाई कर दी थी। भइया बाढ़ से सैकड़ों बीघा फसल पूरी तरह बरबाद हो गई। एक बीघा आलू बोने में करीब पांच हजार रुपये की लागत आती है। धान के साथ ही गन्ना की फसल में भी नुकसान हुआ है।

शहर की कांशीराम कालोनी हैवतपुर गढि़या में बाढ़ का प्रकोप कम तो हुआ, लेकिन दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। आधी कालोनी बाढ़ से प्रभावित है। उससे कुछ दूरी पर ही स्थित गांव रामपुर ढपरपुर में मुख्य मार्ग पर ही पानी की तेज धार बह रही है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पंचायत घर व अन्य सरकारी भवन पानी से लबालब हैं। सड़क कटने से गहरा गड्ढा हो गया। प्राथमिक विद्यालय हैवतपुर गढि़या भी जलभराव के चलते कई दिनों से बंद है। कुछ दूर आगे बढ़े तो गांव कटरी गंगपुर के बाशिदे बैलगाड़ी से बीमार अशोक के पुत्र कांती, दिनेश के पुत्र निखिल को इलाज के लिए ले जा रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कई दिन से बुखार का प्रकोप है। पानी कुछ कम हुआ तो गांव से बाहर निकले। गांव छोटा शिकारपुर निवासी कांती देवी, उनकी पुत्री साधना, शबनम, रुचि, इसी गांव की निवासी सरिता, बेबी, प्रेमपाल की पत्नी मालती, पुत्र रोहित, गांव कटरी धर्मपुर निवासी सावित्री भी बुखार से पीड़ित उन्हें ट्रैक्टर ट्राली से इलाज के लिए शहर लाया गया। मवेशियों के लिए चारा तक नहीं बचा

गांव कटरी भीमपुर निवासी गंगा सिंह की पत्नी प्रेमलता ने बताया कि गांव में पानी भरने से उनके घर की कच्ची दीवार ढह गई, जिससे हैंडपंप भी टूट गया। इसी गांव के निवासी वीरभान ने बताया कि मवेशियों के लिए खेत में चारा नहीं बचा। पानी भरने से भूसा भी खराब हो गया। इस कारण कटरी क्षेत्र के लोग मवेशी सुरक्षित ठिकानों पर ले जा रहे हैं। कुछ लोग मवेशी कम कीमत पर बेच रहे हैं। नाव चला रहे, नहीं मिला पारिश्रमिक

गांव धर्मपुर कटरी निवासी ईशाक मोहम्मद बिलाबलपुर नाले पर नाव से लोगों को पार उतार रहे हैं। उन्होंने बताया कि चार माह में नौवीं बार बाढ़ आयी। दो माह पहले भी नाव चलाते रहे। राजस्व कर्मियों ने उन्हें रुपये दिलाने का भरोसा दिया था, लेकिन अभी तक खाते में एक भी पैसा नहीं आया। उनका खुद का भी घर गिर गया। वह दूसरे के मकान में रह रहे हैं।

एक-दो दिन में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद

जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ शरणालयों में लोग जाने को तैयार नहीं हैं। दो शरणालयों में कुछ लोग आश्रय लिए हैं। उनके लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। बाढ़ से प्रभावित परिवारों को वितरण के लिए खाद्य सामग्री की आवश्यकता के बारे में तहसीलों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने पर राहत किटों का वितरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब बाढ़ का पानी कम हो रहा है। एक-दो दिन में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। फसलों के नुकसान का आकलन बाढ़ का पानी उतरने के बाद किया जाएगा। वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हैं। बाढ़ प्रभावित जनसंख्या - 45742

पूर्ण रूप से प्रभावित गांव - 48

आंशिक प्रभावित गांव - 98

संपर्क मार्ग कटे - 35

बाढ़ शरणालय - 24

बाढ़ चौकियां - 52

संचालित नाव - 53

स्वास्थ्य टीमें - 17

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