इलाज के नाम पर घर रहने की सलाह

'इलाज' के नाम पर घर रहने की सलाह

जागरण संवाददाता फर्रुखाबाद जैसे-जैसे कोरोना का संक्रमण जिले में बढ़ता जा रहा है वैसे-व

JagranMon, 19 Apr 2021 08:35 PM (IST)

जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : जैसे-जैसे कोरोना का संक्रमण जिले में बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे ही स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बिगड़ते जा रही है। कोरोना जांच कराने के लिए भीड़ लोहिया अस्पताल में उमड़ रही है, लेकिन वहां केवल एक काउंटर होने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना होता है। जब रिपोर्ट पाजिटिव आती है तो उसे इलाज के नाम पर घर रहने की सलाह ही मिलती है। घरों पर रह रहे मरीजों को इधर-उधर वाट्सएप और फेसबुक पर वायरल हो रहे इलाज के पर्चों का सहारा लेना पड़ रहा है। कोरोना कंट्रोल रूम से जो दवाओं की लिस्ट बताई जाती है, वह निजी मेडिकल स्टोर पर ब्लैक में मिल रही है।

सोमवार को डॉ. राममनोहर लोहिया जिला चिकित्सालय में कोरोना की जांच कराने के लिए भीड़ उमड़ी। इस दौरान वहां जांच की व्यवस्था के नाम पर एक ही काउंटर है। वहीं पर मरीजों का रजिस्ट्रेशन होता है और वहीं पर जांच। इससे पहले मरीज को लोहिया अस्पताल का पर्चा भी बनवाना पड़ता है। अमृतपुर क्षेत्र से आए ऋषभ बाजपेई करीब तीन घंटे तक अपनी जांच कराने के लिए मशक्कत करते रहे। जब तेज धूप के कारण वह लाइन में लगने से असमर्थ हो गए तो उन्होंने एक-दो लोगों से मदद मांगी। उसके बाद उनकी जांच हो सकी और वह पाजिटिव पाए गए। वहां इलाज के नाम पर उन्हें घर पर रहने की सलाह ही मिली। ऐसे ही न जाने कितने मरीजों को यह दुश्वारी झेलनी पड़ती है। जांच कराने गए लोग भी संक्रमित लोगों के संपर्क में आ रहे हैं। क्योंकि भीड़ में जमकर धक्का-मुक्की होती है।

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अस्पताल में 19 मरीज भर्ती, ऑक्सीजन पर्याप्त होने का दावा

एल-2 हॉस्पिटल में इस समय 19 मरीज भर्ती हैं। शासन के आदेश पर प्रतिदिन जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी एल-2 अस्पताल पहुंचकर मरीजों से हालचाल ले रहे हैं। सीएमओ ने बताया कि 100 बेड का अस्पताल बनाया गया है। गंभीर मरीजों को ही एल-2 में रखा जा रहा है। उनका दावा है कि 20 बड़े व दस छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर भरे हैं। यहां पर आक्सीजन की कोई कमी नहीं है।

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एल-2 अस्पताल गेट पर तोड़ा दम

घर पर रह रहे एक कोरोना संक्रमित मोहल्ला रस्तोगी निवासी मरीज अजय रस्तोगी की हालत बिगड़ गई। स्वजन इलाज के लिए इधर-उधर भाग-दौड़ करते रहे। जब कहीं उसे इलाज नहीं मिला तो हाथ-पैर जोड़कर एंबुलेंस से एल-2 अस्पताल लाया गया। तब तक काफी देर हो चुकी थी। मरीज ने अस्पताल के गेट पर ही मरीज ने दम तोड़ दिया। उसे एंबुलेंस से घर भेज दिया गया। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पूर्व में संक्रमित निकला था, जिसके बाद उसकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी।

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बाजार में ऊंचे दामों पर बिक रहे उपकरण

कोरोना संक्रमित मरीजों को कंट्रोल रूम से फोन कर पल्स आक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर के अलावा दवाएं भी बताई जाती हैं। बाजार में पल्स आक्सीमीटर पहले तो उपलब्ध नहीं है। कुछ चुनिदा दुकानों पर है तो तीन गुने दामों में बिक्री हो रही है। तीन माह पहले जो पल्स आक्सीमीटर 650 रुपये का था, वह अब 1500 रुपये से ज्यादा की कीमत पर बिक रहा है। यही हाल थर्मल स्कैनर का है। बाजार में आइवरमेक्टिन, विटामिन सी और विटामिन डी-3 ऊंचे दामों पर बिक रही है।

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बाजार से नदारद है रेमडेसिविर

गंभीर कोरोना संक्रमितों को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया जाता है, लेकिन यह इंजेक्शन बाजार में उपलब्ध नहीं है। पिछले साल मेडिकल स्टोर में यह इंजेक्शन आया था। बताया गया है कि इंजेक्शन की कीमत 2800 रुपये है, लेकिन बाहर शहरों में कई गुना दामों पर बिक रहा है। हालांकि जनपद में यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। जिला औषधि निरीक्षक अशोक कुमार का कहना है कि सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की खुले बाजार में आपूर्ति पर प्रतिबंध लगा दिया है। केवल सरकारी अस्पतालों को ही आपूर्ति हो रही है। इसका उपयोग एल-3 स्तर (मल्टी आर्गन फेल्योर) वाले मरीजों पर किया जाता है। बिना चिकित्सक की सलाह के इस इंजेक्शन का प्रयोग घातक हो सकता है। उन्होंने बताया कि सीएमओ को 112 इंजेक्शन शासन से आवंटित किए गए थे। सोमवार की रिपोर्ट के मुताबिक 90 इंजेक्शन स्टाक में हैं।

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एल-2 अस्पताल में ड्यूटी करने से कतरा रहे चिकित्सक

एल-2 अस्पताल में एलोपैथी और आयुर्वेदिक चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें एलोपैथी के चिकित्सक डॉ. विवेक विलियम दुबे और डॉ. सुमित शाक्य गैरहाजिर चल रहे हैं। एल-2 अस्पताल आयुर्वेदिक चिकित्सकों के हवाले हैं।

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''आपातकालीन स्थिति के लिए नवाबगंज में 98 बेड का एल-2 अस्पताल तैयार कराया जा रहा है। ताकि मरीजों की संख्या बढ़ने पर उन्हें वहां इलाज दिया जा सके। एल-2 अस्पताल में ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले चिकित्सकों का वेतन रोक दिया गया है। कोरोना की जांच प्रत्येक सीएचसी और नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भी हो रही है, लेकिन अधिकांश लोग लोहिया अस्पताल ही पहुंच रहे हैं। वहां काउंटर बढ़ाए जाएंगे।''

- डॉ. वंदना सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी।

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