सीताराम विवाहोत्सव की तैयारियों में निहाल हो रही रामनगरी

अयोध्या रामनगरी सीता-राम विवाहोत्सव की तैयारियों में निहाल हो रही है।

JagranFri, 03 Dec 2021 12:29 AM (IST)
सीताराम विवाहोत्सव की तैयारियों में निहाल हो रही रामनगरी

अयोध्या : रामनगरी सीता-राम विवाहोत्सव की तैयारियों में निहाल हो रही है। अगहन शुक्ल पंचमी के हिसाब से आराध्य और आराध्या का विवाहोत्सव आठ दिसंबर को मनाया जाएगा, कितु उत्सव की तैयारियां गुरुवार से ही शुरू हो गई हैं। यह उत्सव रामनगरी के जिन मंदिरों में महनीय अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है, उनमें मधुर उपासना परंपरा की शीर्ष पीठ रंगमहल प्रमुख है।

यहां पांच दिसंबर यानी रविवार को गणेश पूजन और सायं मुनि आगमन एवं ताड़का तथा मारीच-सुबाहु वध के प्रसंग की प्रस्तुति के साथ उत्सव का आरंभ होगा। अगली शाम राम विवाह के प्रसंग के अनुरूप फुलवारी लीला एवं नगर दर्शन की प्रस्तुति, मंगलवार को धनुष यज्ञ एवं परशुराम-लक्ष्मण संवाद तथा बुधवार को राम बरात के प्रस्थान के साथ उत्सव को चरम का स्पर्श मिलेगा। उत्सव की तैयारियों में गुरुवार से ही तल्लीन रंगमहल के महंत रामशरणदास के अनुसार श्रीराम हमारे लिए शाश्वत चैतन्य सत्ता हैं और उनके पाणिग्रहण का उत्सव मां सीता के साथ हम भक्तों के लिए भगवान से एकात्म होने का महोत्सव है। रामजन्मभूमि की ओर जाते मार्ग के नुक्कड़ पर दशरथमहल बड़ास्थान अपनी भव्यता के साथ त्रेतायुगीन विरासत का स्मरण कराता है। मान्यता है कि यहीं राजा दशरथ का महल था और रामलला जहां जन्मे, वह इसी महल का प्रसूति गृह था।

अब जबकि रामजन्मभूमि की प्रमाणिकता सदियों बाद संक्रमण से उबर चुकी है, तो दशरथमहल भी कुछ अधिक तना प्रतीत हो रहा है। हालांकि राम विवाह की तिथि आठ दिसंबर को है, पर दशरथमहल के प्रशस्त प्रांगण का कोना-कोना गुरुवार से ही उत्सव के लिए सज्जित होने लगा है। दशरथमहल में सात दिवसीय उत्सव की शुरुआत शुक्रवार से हो रही है। रामकथा मर्मज्ञ जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य रामविवाह पर केंद्रित रामकथामृत का पान कराएंगे। दशरथमहल में उनका प्रवचन तीन से नौ दिसंबर तक अपराह्न तीन से छह बजे तक प्रतिदिन प्रस्तावित है।

साप्ताहिक आयोजन के साथ बुधवार को भव्य राम बरात संयोजित करने की तैयारियों में लगे दशरथ महल पीठाधीश्वर बिदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य याद दिलाते हैं, रामलला और रामनगरी की अस्मिता से सदियों बाद न्याय हुआ है और यह श्रीराम की इच्छा से ही संभव हुआ है, अब वह दिन दूर नहीं कि अयोध्या अपनी विरासत के अनुरूप दुनिया को दिशा देगी और हम राम विवाहोत्सव के साथ श्रीराम एवं मां सीता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। रामवल्लभाकुंज, जानकीमहल, लक्ष्मणकिला, विअहुतिभवन जैसे मंदिर भी सीता-राम विवाहोत्सव के मौके पर आस्था के केंद्र रहेंगे। पुरातात्विक महत्व का है राम विवाह का यह मंडप

रंगमहल में लकड़ी पर कलात्मक नक्काशी से युक्त सीता-राम विवाह का मंडप पुरातात्विक महत्व का है। इसका निर्माण दो सौ वर्ष पूर्व रंगमहल के संस्थापक आचार्य सरयूशरण ने कराया था। अपनी साधना-सिद्धि और भावप्रवण भक्ति के लिए स्वामी सरयूशरण ही नहीं, उन्होंने जिस काष्ठ मंडप को सीता-राम विवाहोत्सव के लिए निर्मित कराया था, वह भी रंगमहल की महनीय धरोहर है और प्रत्येक वर्ष इसी मंडप में विवाह की रस्म के साथ सीता-राम विवाहोत्सव का रस्म संपादित होता है। रंगमहल के प्रबंधन में इस मंडप की सहेज-संभाल प्रमुखता से शामिल होती है। महंत रामशरणदास ने हाल ही में आवश्यक मरम्मत और पालिश के साथ इस मंडप को नवजीवन प्रदान किया है।

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