रामनगरी में भोर से ही प्रवाहित हुई गुरु के प्रति आदर-अनुराग की रसधार

सनातन परंपरा में गुरु के प्रति अपार आदर अर्पित है और यह सच्चाई रामकथा के प्रतिनिधि ग्रंथ रामचरितमानस से परिभाषित है। मानस के वंदना प्रसंग में गुरु की महिमा विवेचित करते हुए गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं बंदउं गुरु पद कंज कृपा सिधु नर रूप हरि/ महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर। गुरु की यह विरासत रामनगरी में शनिवार को नए सिरे से परिलक्षित हुई।

JagranSat, 24 Jul 2021 11:30 PM (IST)
रामनगरी में भोर से ही प्रवाहित हुई गुरु के प्रति आदर-अनुराग की रसधार

अयोध्या : सनातन परंपरा में गुरु के प्रति अपार आदर अर्पित है और यह सच्चाई रामकथा के प्रतिनिधि ग्रंथ रामचरितमानस से परिभाषित है। मानस के वंदना प्रसंग में गुरु की महिमा विवेचित करते हुए गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं, बंदउं गुरु पद कंज कृपा सिधु नर रूप हरि/ महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर। गुरु की यह विरासत रामनगरी में शनिवार को नए सिरे से परिलक्षित हुई। मौका, गुरुपूर्णिमा का था और मौके के अनुरूप प्रात: से ही गुरु के प्रति अनुराग अर्पित हुआ। हालांकि कोरोना संकट के चलते पूर्व की अन्य गुरुपूर्णिमा की भांति शिष्यों-श्रद्धालुओं का प्रवाह तो नहीं था, पर गुरु के प्रति समर्पण की रंगत कम चटख नहीं थी। नित्यक्रिया-स्नानादि से निवृत्त हो शिष्यों की जमात गुरु आश्रमों की ओर उन्मुख हुई। शिष्यों का सर्वाधिक दबाव शीर्ष पीठ मणिरामदास जी की छावनी की ओर रहा। गत वर्ष से ही स्वास्थ्य लाभ ले रहे छावनी पीठाधीश्वर एवं रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास लंबे समय बाद मेडीकेटेड कक्ष से बाहर आए और शिष्यों को निकट से दर्शन दिया। कुछ शिष्यों को उनके पूजन का मौका भी मिला। छावनी की परंपरा के बाकी शिष्यों ने उनके उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास का पूजन किया। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के साथ भाजपा के महानगर मंत्री आकाशमणि त्रिपाठी ने भी संगठन के लोगों के साथ महंत का पूजन किया। यह सिलसिला छावनी से कुछ ही फासले पर स्थित एक अन्य शीर्ष पीठ रामवल्लभाकुंज में भी परवान चढ़ा। रामवल्लभाकुंज के महंत रामशंकरदास वेदांती सहित मंदिर के अधिकारी राजकुमारदास के प्रति प्रात: से ही शिष्यों का आदर प्रकट हुआ। इससे पूर्व पीठ के पूर्वाचार्यों के विग्रह का विधि-विधान से अभिषेक-पूजन किया गया। आचार्य पीठ दशरथमहल बड़ास्थान में गुरुपूर्णिमा महोत्सव की शुरुआत पीठ के संस्थापक एवं साधना-सिद्धि के पर्याय माने जाने वाले स्वामी रामप्रसादाचार्य के विग्रह पूजन से हुई। दशरथमहल के वर्तमान पीठाधीश्वर बिदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य ने आचार्य विग्रह का अभिषेक-पूजन के साथ आरती की एवं भोग लगाया। इसके बाद स्वयं उनका पूजन शुरू हुआ। गुरु परंपरा के प्रतिनिधि आचार्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के रामघाट स्थित आश्रम पर भी श्रद्धालुओं का तांता लगा। जगद्गुरु ने आद्याचार्य एवं अपने गुरु स्वामी हर्याचार्य का पूजन कर उत्सव की शुरुआत की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु का पूजन किया। एक अन्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य एवं सीतारामनिवास के पीठाधीश्वर श्रीरामाचार्य का दशविधि स्नान एवं राजोपचार के साथ पूजन किया गया। उनके शिष्य विवेकदास के अनुसार गुरु पूजन में दूर-दराज तक के शिष्य शामिल हुए। मधुर उपासना परंपरा की प्रधान पीठ रंगमहल के महंत रामशरणदास के पूजन के लिए भी शिष्यों की कतार लगी। इनमें जन साधारण से लेकर नौकरशाह, उद्यमी आदि शामिल रहे। हालांकि स्वास्थ्य लाभ ले रहे महंत ने दूर से ही शिष्यों को आशीर्वाद दिया। तोताद्रिमठ में जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी अनंताचार्य के भी पूजन के लिए शिष्यों का तांता लगा रहा। रामघाट स्थित दिग्गज शास्त्रज्ञ ब्रह्मलीन स्वामी अखिलेश्वरदास की पीठ रामकुंज कथामंडप भी आस्था के केंद्र में थी। रामकुंज के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामानंददास के संयोजन में संपादित पूजन-अनुष्ठान के साथ शिष्यों की बड़ी पांत उनके पूजन में लगी। इससे पूर्व उन्होंने आचार्य विग्रह का पूजन किया। रसिक उपासना परंपरा की शीर्ष पीठ लक्ष्मणकिला में गुरुपूर्णिमा का उल्लास पूर्वाचार्यों के पूजन से छलका। वर्तमान लक्ष्मणकिलाधीश महंत मैथिलीरमणशरण का पूजन करने वालों का तांता लगा। पूर्व सांसद डॉ. रामविलासदास वेदांती का भी विधि-विधान से पूजन हुआ। उनके उत्तराधिकारी एवं वशिष्ठ भवन के महंत डॉ. राघवेशदास के संयोजन में देर शाम तक गुरु पूजन की छटा व्याप्त रही। दिग्गज आचार्य पं. उमापति त्रिपाठी की पीठ तिवारी मंदिर पर भी शिष्यों का सैलाब उमड़ा। पं. उमापति के वंशज एवं तिवारी मंदिर के वर्तमान महंत गिरीशपति त्रिपाठी का शिष्यों ने प्रात: से अपराह्न तक पूजन किया। राजघाट स्थित श्रीविद्यापीठ में रामकथा मर्मज्ञ डॉ. सुनीता शास्त्री ने मां ब्रह्मविद्यादेवी के साथ दिग्गज संत करपात्री जी एवं स्वामी सीतारामशरण के छायाचित्र का पूजन किया। उन्होंने स्वयं का पूजन कराने से इंकार कर दिया। कहा, पूर्ववर्ती गुरुओं का ही पूजन पर्याप्त है। निष्काम सेवा ट्रस्ट में महंत रामचंद्रदास ने गुरु विग्रह के पूजन से उत्सव की शुरुआत की। इसके बाद शिष्यों ने उनका पूजन किया। निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास के प्रति भी शिष्यों का अनुराग छलका। टेढ़ीबाजार स्थित कालिकुलालय तंत्र साधना संस्थान में शिष्यों ने संस्थान प्रमुख डॉ. रामानंद शुक्ल की पूजा की। इससे पूर्व डॉ. शुक्ल के संयोजन में विशेष अनुष्ठान संपादित हुआ। आद्याचार्य के रूप में हनुमान जी रहे आस्था के केंद्र में

- बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी आस्था के केंद्र में रही। रामानंदीय परंपरा के संत हनुमान जी को आद्याचार्य मानते हैं और इसी मान्यता के अनुरूप बजरंगबली के प्रति आस्था की धार प्रवाहित हुई। हनुमानगढ़ी से जुड़े शीर्ष महंत ज्ञानदास ने उत्सव की शुरुआत की। तदुपरांत उनकी पूजा के लिए शिष्यों की कतार आगे आयी। महंत ज्ञानदास ने कहा, गुरु के प्रति अनुराग का आशय सभी विसंगतियों से ऊपर उठ कर ज्ञान के प्रकाश में निमज्जन है। इस मौके पर महंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी संजयदास, रामप्रसाददास, हेमंतदास आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। नाका हनुमानगढ़ी भी रही गुलजार

- रामनगरी के कुछ फासले पर स्थित नाका हनुमानगढ़ी भी गुरुपूर्णिमा पर गुलजार हुई। पीठाधिपति महंत रामदास ने गुरु भास्करदास के चित्र का पूजन किया। तदुपरांत शिष्यों ने उनका पूजन किया। इससे पूर्व हनुमान जी सहित मंदिर परिसर के अन्य देवी देवताओं का अभिषेक-पूजन विधि-विधान से किया गया। महंत रामदास ने कहा, गुरु से संबंध अत्यंत आत्मिक है और इसीलिए उसे भवसागर से पार कराने वाला कहा गया है। दिग्गज आचार्य के प्रति छलका अनुराग

- दिग्गज आचार्य बाबा संगतबक्स के भी प्रति अनुराग छलका। उन्होंने रानोपाली स्थित जिस उदासीन ऋषि आश्रम की स्थापना की थी, वहां गुरु पूजन के लिए दूर-दराज तक के शिष्यों का तांता लगा। पूजन की शुरुआत उदासीन आश्रम के वर्तमान पीठाधीश्वर डॉ. भरतदास ने की। उन्होंने कहा, यह अवसर महान आचार्य के अवदान को प्रणाम करने का ही नहीं है, बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलकर मानवता को नई ऊंचाई प्रदान करने का है। रामलला के मुख्य अर्चक को बब्लू खान ने किया नमन

- गुरु पूर्णिमा की पावन बेला में भाजपा नेता एवं समाजसेवी बब्लू खान ने रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास का पूजन किया। उन्होंने कहा, वे सौम्य, सुहृद आचार्य श्री के साथ देश की संत परंपरा को नमन कर रहे हैं और गुरुओं-संतों एवं फकीरों के प्रताप से ही भारत विश्व गुरु था और रहेगा। इस दौरान सत्यधाम में रामलला के मुख्य अर्चक को नमन करने वालों का तांता लगा रहा।

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