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कोरोना ने बढ़ाई सब्जी किसानों की दिक्कतें

कोरोना ने बढ़ाई सब्जी किसानों की दिक्कतें

सब्जी की खेती करने वाले किसानों की कोरोना ने मुश्किलें

JagranSun, 16 May 2021 11:22 PM (IST)

अयोध्या : सब्जी की खेती करने वाले किसानों की कोरोना ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोरोना क‌र्फ्यू के चलते किसानों को आढ़तियों के हाथों औने-पौने दाम में सब्जी बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। किसान बेहाल हैं। उसके सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया है। किसानों की विवशता का फायदा आढ़ती और फुटकर दुकानदार उठा रहे हैं। किसान फतेहबहादुर सिंह कहते हैं कि उन्होंने भिडी की खेती की हैं।

कोरोना क‌र्फ्यू लगने से पहले एक बार लगा कि यह सीजन अच्छा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कोरोना क‌र्फ्यू के लगते ही थोक मंडी में सब्जियों के भाव जमीन पर आ गए। भले ही थोक व्यापारी व फुटकर दुकानदार उसका लाभ उठा रहे हैं। मौजूदा समय में थोक में भिडी तीन से पांच रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से आढ़ती ले रहे हैं। किसी-किसी दिन यह दो से तीन रुपए प्रति किलो के भाव में बेचना पड़ रहा है। मजबूरी है, खेतों में उसे सड़ने के लिए छोड़ा नहीं जा सकता। लागत नहीं निकल पा रही हैं। किसानों की मेहनत का फायदा आढ़ती व फुटकर दुकानदार उठा रहे हैं। फुटकर दुकानदार व्यापारियों से वही भिडी आठ से 10 रुपये में खरीद कर 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेच रहे हैं। किसानों को उसके परिश्रम का लाभ न मिलने से उसके सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया है। भिडी की तरह ही करेला, तरोई, लोबिया व लौकी आदि की खेती करने वाले किसान भी बेहाल हैं।

किसान अमरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि पहले किसानों के खेत से आने वाली सब्जी के दामों में और फुटकर विक्रेता के दामों में पांच से छह रुपए का अंतर होता था। किसानों को उसका लाभ मिल जाता था। अब किसानों के खेतों से आने वाली सब्जियों के दामों तथा फुटकर विक्रेता के दामों में 15 से 20 रुपये का अंतर होने लगा है। वह कहते हैं गत वर्ष लाकडाउन के समय भी किसानों की मुश्किलें बढ़ गई थी, यही हालात रहे तो परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा।

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