हत्यारोपितों की तलाश में लगाई गईं तीन टीमें

हत्यारोपितों की तलाश में लगाई गईं तीन टीमें
Publish Date:Fri, 30 Oct 2020 12:33 AM (IST) Author: Jagran

मयाबाजार(अयोध्या): महराजगंज थाना क्षेत्र के सिलौनी गांव निवासी बसंत सिंह की पीट कर की गई हत्या के मामले में पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा दर्ज किया है। डीआईजी दीपक कुमार के निर्देश पर हत्यारोपित दो नामजद व कई अज्ञात की तलाश में क्राइम ब्रांच सहित तीन टीमें लगाई गईं हैं। हत्या के 36 घंटे बाद भी पुलिस आरोपितों में से किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकी है। गांव में सन्नाटा पसरा है और पीड़ित परिवार सहमा हुआ है।

डीआईजी ने सीओ सदर आरके चतुर्वेदी को हत्या के पर्दाफाश की जिम्मेदारी सौंपी है। उनके नेतृत्व में गठित टीमों ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। घर छोड़ कर भागे आरोपियों के परिवारीजनों से पुलिस पूछताछ कर रही है लेकिन सभी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक युवक की मौत का कारण सिर में चोट और अत्यधिक रक्तस्त्राव बताया गया है। बुधवार सुबह गोसाईंगंज थाना क्षेत्र में टंडौली गांव स्थित करिया बाबा मंदिर के समीप देशी शराब ठेका के पीछे कुछ दूर पर बरसीम के खेत में 28 वर्षीय बसंत सिंह का शव मिला था। घटना स्थल पर मौजूद साक्ष्य और युवक के शरीर पर मौजूद चोट के निशान इस बात की तस्दीक कर रहे थे कि हत्या में कई लोग शामिल रहें होंगे। गोसाईंगंज थाना प्रभारी निरीक्षक श्याम सुंदर पांडेय ने बताया कि पीड़ित पिता अशोक सिंह की तहरीर पर गांव निवासी आलोक सिंह व दुर्गेश सिंह सहित तीन अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

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इनसेट..

- 24 घंटे बाद पुलिस ने बटोरे साक्ष्य

पुलिस की गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि बुधवार की सुबह घटनास्थल पर देखे गए साक्ष्यों का संकलन पुलिस ने गुरुवार की सुबह किया। बुधवार को घटनास्थल का लगभग सभी अधिकारियों ने निरीक्षण किया था लेकिन पुलिस ने मौके पर मौजूद शव के पास पड़ी युवक की चप्पल, पेन और डंडे को वहीं छोड़ दिया था। थाना प्रभारी की मानें तो अभी तक युवक के मोबाइल का पता नहीं लगाया जा सका है। मोबाइल को ट्रेस करने के लिए नंबर सर्विलांस पर लगाया गया है।

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- गंभीर होती पुलिस तो न होती हत्या

बसंत की हत्या के मामले में अगर पुलिस ने पहले ही कदम उठाया होता तो आज यह दिन न देखना पड़ता। पीड़ित पिता अशोक सिंह ने बताया कि दो माह पूर्व एक किशोरी से दुष्कर्म के प्रयास की घटना में बेटा गवाह था। लगातार आरोपी दबाव बना रहे थे कि वह गवाही से हट जाए। घर पर आकर जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। बीती 27 अगस्त को हत्या की आशंका व्यक्त करते हुए ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गयी थी। महराजगंज थाने में तैनात तत्कालीन जांच अधिकारी उपनिरीक्षक रामनरेश ने चार सितंबर को दी रिपोर्ट में बसंत के आरोपों को मनगढ़ंत करार देते हुए किसी भी कार्रवाई की आवश्यकता को खारिज कर दिया था। अगर जांच अधिकारी ने निष्पक्ष होकर जिम्मेदारी का निर्वहन किया होता तो तस्वीर कुछ और होती।

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