बारिश ने बनाया कहीं खुशी-कहीं गम का माहौल

जागरण संवाददाता इटावा चक्रवात टाक्टे तूफान के असर से बीते रविवार की रात से रुक-रुकक

JagranTue, 18 May 2021 07:44 PM (IST)
बारिश ने बनाया कहीं खुशी-कहीं गम का माहौल

जागरण संवाददाता, इटावा : चक्रवात टाक्टे तूफान के असर से बीते रविवार की रात से रुक-रुककर बारिश होने का सिलसिला मंगलवार को भी बरकरार रहा। कई बार सूरज चमके लेकिन बेअसर साबित हुए। तापमान में गिरावट जारी है इसके तहत सुबह न्यूनतम 23 तो दोपहर में अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जिन किसानों का गेहूं खुले में रखा था उनमें कुछ का भींग गया जबकि कई किसानों ने कड़ी कवायद करके सुरक्षित कर लिया। सब्जियों तथा अन्य फसलों के लिए यह बारिश लाभदायक बताई जा रही है। मौसम गुरुवार तक इसी तरह का रहने की संभावना व्यक्त की गई है।

बीते तीन दिनों से मौसम मई माह की भीषण गर्मी में सावन-भादौं माह का अहसास करा रहा है। दिन में 10 से 12 किमी की स्पीड से हवा चलने पर दोपहर में लोगों ने सुकून महसूस किया। कोविड-19 महामारी की दूसरी तीव्रलहर को लेकर साप्ताहिक बंदी से सड़कों पर सन्नाटा सा पसरा है, बारिश में और ज्यादा सन्नाटा हो गया। यदाकदा सूरज चमके लेकिन थोड़ी ही देर में बारिश होने से फिर से वही हालात हो गए। इस दौरान झोपड़ पट्टी, टिनशेड या पुराने जर्जर घरों में निवास कर रहे लोगों को पानी से बचाव के लिए कड़ी मशक्कत करते देखा गया।

किसानों के लिए बारिश वरदान

जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह ने बताया कि रुक-रुककर हो रही बारिश मूंग, अरबी, उर्द तथा अन्य सब्जियों की फसलें तैयार कर रहे किसानों के लिए इस समय किसी वरदान से कम नहीं है। इस जनपद को धान का कटोरा कहा जाता है, बारिश से धान उत्पादक किसानों का धान की नर्सरी के लिए खेतों की जोताई के लिए भरपूर पानी मिल गया। मौसम साफ होने पर चारों ओर खेतों में जोताई शुरू हो जाएगी। इससे धान की नर्सरी और पशुओं के चारा तथा मक्का, ज्वार बाजरा सहित अन्य जायद की फसलों की तैयारी शुरू हो जाएगी।

दो दिन और ऐसे ही रहेंगे हालात

कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडेय का कहना है कि चक्रवात टाक्टे तूफान से प्रदेश के मैदानी क्षेत्र में बारिश कहीं तेज तो कहीं बूंदाबांदी के रूप में हो रही है। तूफान का वेग हल्का कम हुआ है इसके बावजूद आगामी दो दिनों तक ऐसी ही हालात रहने की संभावना है। इस दौरान यातायात काफी सजगता से किया जाए। तेज हवा चलने पर पेड़, बिजली के पोल के नीचे कतई खड़े न हो। किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुरूप खेतिहर कार्य करें।

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