जिला पंचायत पर फहरेगी समाजवादी परिवार की पताका: अभिषेक

जिला पंचायत पर फहरेगी समाजवादी परिवार की पताका: अभिषेक

संवाद सहयोगी सैफई पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभि

JagranMon, 19 Apr 2021 05:24 PM (IST)

संवाद सहयोगी, सैफई : पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव ने दावा किया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर समाजवादी परिवार का ही शख्स आसीन होगा। भले ही सत्तारूढ़ भाजपा कितना ही दावा क्यों न करें, लेकिन सपा की विजय पताका फहराने से कोई नहीं रोक पाएगा। सैफई के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मतदान केंद्र पर वोट डालने के बाद निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव ने पत्रकारों से वार्ता में कहा कि 1988 से जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर समाजवादी परिवार का ही प्रतिनिधि काबिज रहा है, इस दफा भी ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा कि सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ तौर पर कहा है कि जिला पंचायत की सभी 24 सीटों पर हर हाल में विजय हासिल करनी है, तभी इटावा में असल समाजवाद दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि वह पंचायत चुनाव के दरम्यान विभिन्न ग्रामीण इलाकों में वोट मांगने गए तो वहां भाजपा के खिलाफ बड़े पैमाने पर जन आक्रोश देखा गया है। इससे यह बात स्पष्ट है कि भाजपा पंचायत चुनाव में शून्यता की ओर जाती हुई दिख रही है। जनपद की आठ ब्लॉक प्रमुख सीटों पर भी सपा के ही उम्मीदवार जीतेंगे। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव, अपनी पत्नी डॉ. अंजली, मां पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमलता यादव, पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव की मां मृदुला, यादव दीपाली के साथ मतदान करने के लिए आए थे। शिवपाल से मिला आशीर्वाद

भाजपा की रणनीति की हवा निकालने के लिए प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने अपने भतीजे और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव को एक बार फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने का आशीर्वाद दिया है। वह चाहते हैं कि अभिषेक एक बार फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आसीन हों। उनके बेटे और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आदित्य यादव का कहना है कि अभिषेक की बेहतर कार्यशैली को देखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह निर्णय लिया है। बहरहाल विरासत बचाने के लिए सपा और प्रसपा एक हो गई हैं। सपा और प्रसपा की ओर से जारी जिला पंचायत सदस्य के 24 उम्मीदवारों की सूची में सात उम्मीदवार संयुक्त उम्मीदवार हैं।

अब दो मई को आने वाले नतीजों पर सबकी निगाहें यह जानने के लिए लगी होंगी कि भाजपा अपनी रणनीति में सफल होती है अथवा समाजवादी परिवार का दबदबा कायम रहता है।

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