रास आया माहौल, सफारी में बढ़े काले मृग व चीत

गौरव डुडेजा इटावा इटावा सफारी पार्क में रह रहे एंटी लोप यानी काला मृग व चीतल यानी स्पॉ

JagranThu, 29 Jul 2021 04:59 PM (IST)
रास आया माहौल, सफारी में बढ़े काले मृग व चीत

गौरव डुडेजा, इटावा

इटावा सफारी पार्क में रह रहे एंटी लोप यानी काला मृग व चीतल यानी स्पॉटिड डियर की संख्या में पिछले पांच सालों में तेजी से वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 में डियर सफारी के शुभारंभ के अवसर पर यहां पर काला मृग व चीतल को 20-20 की संख्या में लाया गया था। अब काला मृग की संख्या बढ़कर 77 व चीतल की संख्या बढ़कर 50 हो चुकी है। सफारी के अधिकारियों के लिए यह खुशखबरी के संकेत हैं। डियर सफारी में काला मृग व चीतल इन दिनों जमकर उछलकूद मचा रहे हैं।

यह कहना मुनासिब होगा कि काले मृग व चीतल को इटावा सफारी का माहौल रास आ गया है। सबसे पहले अक्टूबर 2016 में काले मृग को कानपुर व लखनऊ चिड़ियाघर से लाया गया था। 10 काले मृग कानपुर चिड़ियाघर से व 10 लखनऊ चिड़ियाघर से लाए गए थे। इनमें आधी संख्या में मादा थीं। जबकि चीतल को भी सितंबर व अक्टूबर 2016 में कानपुर चिड़ियाघर से 10 व लखनऊ चिड़ियाघर से 10 की संख्या में लाया गया था। उसके बाद से पांच सालों में इनकी संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। मादा काला मृग व चीतल साढ़े पांच माह में गर्भधारण के बाद बच्चों को जन्म देती है। यही कारण है कि इनकी संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। सफारी पार्क में हिरनों की सबसे बड़ी प्रजाति सांभर की संख्या भी अब 13 हो गई है। इन्हें भी वर्ष 2016 में जब लाया गया था तो इनकी संख्या 9 थी। इनका गर्भाधान काल साढ़े आठ माह का होता है। शेड्यूल-1 श्रेणी के जानवर हैं काला मृग व चीतल केंद्र सरकार के वन्य जीव अधिनियम 1971 के अंतर्गत शेड्यूल-1 श्रेणी के जानवर हैं। यह खुले मैदानों में रहते हैं जिसके कारण इनका शिकार हो जाता है। सर्वाधिक चीता द्वारा इनका शिकार किया जाता है। इसलिए केंद्र सरकार ने इन्हें संरक्षित करने के लिए शेड्यूल-1 श्रेणी में रखा है। इटावा सफारी पार्क में इनको संरक्षण के उद्देश्य से लाया गया है। काले मृग को कृष्ण मृग भी कहा जाता है और यह अपनी खूबसूरती के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। इटावा सफारी पार्क में काले मृग व चीतल की संख्या में खासी बढ़ोत्तरी हुई है। इसका प्रमुख कारण इन्हें पर्याप्त भोजन उपलब्ध होना है। संरक्षण होने के कारण इनके गर्भाधान में कोई व्यवधान नहीं आता है। संख्या बढ़ने पर इन्हें देश के अन्य चिड़ियाघरों में स्थानांतरित भी किया जाता है। अरुण कुमार सिंह, उपनिदेशक इटावा सफारी पार्क

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