सैफई के सहकारी प्रबंध प्रशिक्षण केंद्र का हाल-बेहाल

संवाद सहयोगी, सैफई : सैफई गांव से दो किमी दूर इटावा रोड पर बने सहकारी प्रबंध प्रशिक्षण केंद्र का हाल-बेहाल है। इस केंद्र को प्रदेश सरकार ने 12 साल से एक रुपये की भी मदद नहीं की है। एक लिपिक व दो प्रवक्ताओं के सहारे यह केंद्र चल रहा है। वर्ष 1979 में तत्कालीन सहकारिता मंत्री मुलायम ¨सह यादव ने इस प्रशिक्षण केंद्र की नींव रखी थी। इसका मुख्य उद्देश्य किसान के लड़कों को सहकारी मैनेजमेंट का प्रशिक्षण देना था।

सहकारी समितियों की नियुक्तियों में इस केंद्र के डिप्लोमा धारकों को वरीयता दी जाती है। साढ़े 4 माह की ट्रे¨नग में एकाउंट ऑडिट, सहकारी लॉ सिखाया जाता है। पूरे प्रदेश में ऐसे केवल 6 प्रशिक्षण केंद्र हैं। किसानों और गरीबों को यहां पर प्रशिक्षण मिल सके उसको लेकर ही इसकी स्थापना की गयी थी। शुरूआत में तो सब ठीक-ठाक चला परंतु बाद में इसकी हालत बद से बदतर होती चली गयी। केंद्र के हॉस्टल की छतों से पानी टपक रहा है। चाहर दीवारी टूटने के कारण जानवर अंदर घुस आते हैं। यहां पर 50 सीटें उपलब्ध हैं वर्तमान में 41 छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। तीन प्रवक्ताओं की स्थायी नियुक्ति होनी चाहिए लेकिन दो प्रवक्ता संविदा में काम कर रहे हैं। वर्ष 1989 में मुलायम ¨सह यादव जब मुख्यमंत्री बने थे तब सहकारिता मंत्री ग्याप्रसाद वर्मा ने इस प्रशिक्षण केंद्र के मी¨टग हॉल के लिए धन आवंटित किया था। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम ¨सह यादव ने भी वर्ष 2004-05 में भवन निर्माण के लिए इस केंद्र को 18 लाख रुपये प्रदान किये थे। उसके बाद से इस केंद्र को कोई मदद नहीं दी गई।

उत्तर प्रदेश सहकारी यूनियन लिमिटेड के अधीन इस केंद्र की दुर्दशा को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र भी लिखे गये परंतु उन पत्रों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। हालात इतने खराब है कि ट्रे¨नग सेंटर की बिजली का बिल छात्रों की फीस से किया जा रहा है। शासन ने बिजली के बिल के लिए भी धनराशि आवंटित नहीं की है। केंद्र का काम देख रहे पूर्व प्रधानाचार्य व इस समय संविदा पर प्रवक्ता पद पर तैनात हरीशंकर त्रिपाठी ने बताया कि शासन द्वारा कोई वित्तीय सहायता न दिये जाने से केंद्र की स्थिति खराब है। केंद्र के संचालन के लिए कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।

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