चुनौती भरे हालातों में भूल गए कोरोना से बचाव की आदतें

चुनौती भरे हालातों में भूल गए कोरोना से बचाव की आदतें
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 06:11 AM (IST) Author: Jagran

केस 1: रोडवेज बस स्टैंड पर सुबह 10 बजे अलग-अलग टुकड़ों में लोगों की भीड़ जुटी है। कुछ लोगों को बाहर जाना है तो कुछ उन्हें छोड़ने आए हैं। बस आने तक भीड़ बढ़ती रहती है। इस बीच लोग एक-दूसरे से बिल्कुल सटे हुए खड़े हैं। मास्क इक्का-दुक्का लोग लगाए हैं। बसों के अंदर भी इतने यात्री हैं कि दूरी की उम्मीद बेमानी है। मास्क की भी रोक-टोक नहीं है।

केस 2: शहर के व्यस्ततम बाजारों में से एक बाबूगंज। दोपहर 12 बजे यहां जमकर भीड़ लगी हुई है। ऐसा नहीं है कि रविवार के अवकाश के कारण यह भीड़ हो। इस तरह का नजारा मंगलवार छोड़, हर दिन रहता है। भीड़ में अधिकांश महिला खरीदार हैं। जिनमें से बहुत कम मास्क लगाए हुए हैं। व्यापारियों में से तो कोई भी मास्क लगाए नहीं नजर आता है। एटा, जागरण संवाददाता : जिले में कोरोना के मामले कम थे तो लोग संजीदा थे। लेकिन मामले बढ़ने पर स्थिति विपरीत है। लगातार बढ़ रहे केस के चलते चुनौती भरा माहौल बन गया है। ऐसे में छोटी-छोटी जरूरी सावधानियां हमें संक्रमण से बचा सकती हैं। लेकिन अधिकांश लोगों ने इन आदतों को भुला दिया है। न तो भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से लोग हिचक रहे हैं और न ही मास्क का नियमित प्रयोग कर रहे हैं। केवल बस स्टैंड-बाबूगंज ही नहीं, सुभाष मूर्ति बाजार, घंटाघर, मैनगंज, गांधी मार्केट, सब्जी मंडी सहित अन्य बाजार और प्रमुख मार्गों पर भीड़भाड़ और लापरवाही का ऐसा ही आलम नजर आता है। पुलिस की तैनाती में कमी नहीं है। लेकिन अब लोगों को भीड़ लगाने और मास्क के प्रयोग के लिए टोकना बंद कर दिया गया है। चल रहा महीनों पुराना जागरूकता संदेश जागरूकता के लिए पालिका द्वारा शहर में लाउडस्पीकर पर संदेश चलाया जा रहा है। जो लॉकडाउन के समय का है। तबसे अब तक परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। लेकिन जागरूकता संदेश को अपडेट करने की जरूरत नहीं समझी गई। 26 दिनों में करीब दोगुने हो गए केस

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हालातों की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि जिले में कोरोना के मामले महज 26 दिनों में करीब दोगुने हो गए हैं। 31 अगस्त को कुल केस 927 थे। 26 सितंबर को यह संख्या 1701 पर पहुंच गई है। वर्जन

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कोरोना से बचाव के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। लोगों को पूरी जानकारी देकर जागरूक बनाया जाए। इस तरह के प्रयास भी किए जा रहे हैं फिर भी जो लोग नहीं मानेंगे तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

- सतीश पाल, नोडल अधिकारी एवं संयुक्त निदेशक

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