दमा रोगियों का दम निकाल रही है गेहूं की रैनी

जेएनएन बुलंदशहरगेहूं कटाई के उपरांत थ्रेशिग द्वारा गेहूं की निकासी से वातावरण में उड़ रही रैनी दमा रोगियों के लिए तो कष्टकारी साबित हो ही रही है एलर्जी के रोगियों के लिए भी परेशानी का सबब बन रही है।

JagranSun, 25 Apr 2021 11:10 PM (IST)
दमा रोगियों का दम निकाल रही है गेहूं की रैनी

जेएनएन, बुलंदशहर,गेहूं कटाई के उपरांत थ्रेशिग द्वारा गेहूं की निकासी से वातावरण में उड़ रही रैनी दमा रोगियों के लिए तो कष्टकारी साबित हो ही रही है एलर्जी के रोगियों के लिए भी परेशानी का सबब बन रही है। गेहूं व जौ फसल की कटाई के साथ ही फसल की थ्रेशिग का कार्य भी तेजी से जारी है। थ्रेशिग के दौरान भूसे के साथ निकलने वाली रैनी वातावरण में उड़ रही है। यही रैनी दमा रोगियों के लिए कष्टकारी साबित हो रही है। रैनी के ‌र्श्वसन तंत्र पर दुष्प्रभाव से दमा व श्वास रोगियों की सांसे घुट रही हैं। उनके रोग की तीव्रता कई गुना बढ़ रही है जिसके कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा रैनी एलर्जी के रोगियों के परेशानी में भी इजाफा कर रही है। रैनी के कारण एलर्जी बढ़ने से रोगियों की परेशानी गुणात्मक रूप से बढ़ रही है। इस विषय में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी डा एसके जैन का कहना कि रैनी ‌र्श्वसन तंत्र को प्रभावित कर दमा रोगियों की परेशानी बढ़ा रही है। उन्होंने इसके लिए रोगियों को मास्क का प्रयोग करने, गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करने की सलाह दी है। इसके अलावा किसानों से थ्रेशिग के दौरान व उपरांत पानी का छिड़काव करने का परामर्श भी दिया है ताकि रैनी को वातावरण में उड़ने से रोका जा सके। उन्होंने एलर्जी के रोगियों को शरीर पर पूरे वस्त्र पहने व साज सफाई को प्राथमिकता बताया है।

डाइट चार्ट के अनुसार करें भोजन, महामारी रहेगी दूर

बुलंदशहर : यदि लोग डाइट चार्ट के अनुसार भोजन करेंगे तो उनकी पाचन शक्ति मजबूत रहेगी। जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और कोरोना संक्रमण की चपेट में आने का खतरा भी कम हो जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र की पोषण विशेषज्ञ कीर्ति मणि त्रिपाठी ने लोगों को यह सलाह देकर महामारी से बचाव के लिए सचेत किया है।

उनका कहना है कि रोजाना पुरुषों के आहर में 90 ग्राम और महिलाओं को 75 ग्राम विटामिन सी की मात्रा शामिल होनी चाहिए। उन्हें सुबह गुनगुने पानी में नींबू, शहद और एक चम्मच पिसा कच्चा जीरा मिलाकर पीना चाहिए। नाश्ते के समय अंकुरित खबुत दालें, दलिया या जई का खेवन करें। बीच में खट्टे मौसमी रसीले फलों का सेवन करें। दोपहर में भोजन में दाल, चावल रोटी, मौसमी सब्जियां जिनमें लैकी, तोरई, सीताफल की सब्जी, करेला, खीरा का इस्तेमाल करें। शाम को नारियल पानी, भुना चना गुड़ के साथ खाएं। रात्रि भोजन में दलिया, खिचड़ी सब्जियां डालकर पकाकर खाएं। सोने से पहले एक गिलास दूध में एक चुटकी सौंठ या एक चुटकी हल्दी डालकर पिएं।

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