आशाएं रात-दिन धरने पर, फार्मासिस्टों ने बांधी काली पट्टी

कई दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहीं आशा बातचीत से भी नहीं निकला कोई हल

JagranWed, 08 Dec 2021 05:07 AM (IST)
आशाएं रात-दिन धरने पर, फार्मासिस्टों ने बांधी काली पट्टी

जासं, एटा: स्वास्थ्य विभाग के संविदाकर्मियों की भले ही हड़ताल खत्म हो गई हो, मगर मुश्किल दूर नहीं हुई हैं। आशाओं ने एलान कर दिया कि वे रात-दिन धरने पर बैठेंगी। वहीं दूसरी तरफ फार्मासिस्ट काली पट्टी बांधकर आंदोलन कर रहे हैं।

कलक्ट्रेट पर आशाओं का धरना-प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। अब वे रात-दिन धरने पर रहेंगी। इसके लिए दिन में ही टैंट आदि की सभी व्यवस्था कर ली गईं। आशाओं ने कह दिया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक धरना खत्म नहीं होगा। सीएमओ को एक ज्ञापन भी दिया गया। आशाएं शासकीय कर्मचारी घोषित करने, सरकार द्वारा तय मजदूरी के हिसाब से मानसिक मानदेय तय करने, यात्रा भत्ता, स्टेशनरी खर्चा, आशा कक्ष की व्यवस्था करने तथा प्रशिक्षण देकर एएनएम के पद पर प्रोन्नत करने की मांग कर रहीं हैं। आशाओं ने यह भी मांग की है कि मानदेय 18 हजार रुपये से कम नहीं होना चाहिए। प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कई बार बातचीत की, मगर कोई हल नहीं निकल रहा। मंडल अध्यक्ष सुषमा देवी, रानी यादव, गुड्डी, सर्वेश, पिकी, अनीता, गीता, विमल देवी, कमला देवी, ममता, सुषमा रेखा, प्रेमलता, विनीता, रेखा, सुमन, शशि प्रभा, मंजू, दीपमाला सक्सेना, प्रीती रानी, रानू सक्सेना, उर्मिला आदि मौजूद रहीं। उधर, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन की प्रांतीय कमेटी के निर्देशन में जनपदीय इकाई ने शासन द्वारा मांगों के संबंध में कार्रवाई न किए जाने के विरोध में काली पट्टियां बांधकर प्रदर्शन किया। मेडिकल कालेज के अलावा जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी फार्मासिस्टों ने काली पट्टियां बांधकर विरोध जताते हुए स्वास्थ्य सेवा दीं। डा. नरेश सिंह शाक्य, डा. राजेंद्र सिंह शाक्य, डा. राजेंद्र सिंह सुमन, डा. रविद्र सचान, डा. नवीन गुप्ता, डा. पुष्पेंद्र पाल सिंह, डा. शिव कुमार, डा. शिवप्रताप सिंह, डा. विनोद कुमार, डा. राजीव यादव, डा. ब्रजेश बाबू शाक्य, डा. निखिल गुप्ता आदि शामिल रहे। स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

-आशाओं के आंदोलन से स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत असर पड़ रहा है। कई दिन से आशा कामकाज नहीं कर रहीं, जबकि उनकी सेवाएं मैटरनिटी के अलावा अन्य कई सरकारी कार्यों में भी ली जाती हैं। जब से आंदोलन शुरू हुआ है तब से आशाएं गर्भवतियों का परीक्षण भी नहीं करा रहीं और न ही कोई अन्य काम कर रही हैं। इस आंदोलन से स्वास्थ्य विभाग के समक्ष मुश्किल आ रही है।

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