मारहरा सीएचसी पर अव्यवस्थाएं, 80 हजार की आबादी पर एक डाक्टर

स्टाफ की कमी अस्पताल से निराश लौट जाते मरीज रविवार को बंद रहता है स्वास्थ्य केंद्र

JagranMon, 24 May 2021 06:22 AM (IST)
मारहरा सीएचसी पर अव्यवस्थाएं, 80 हजार की आबादी पर एक डाक्टर

जासं, एटा: कोरोना संकट काल में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर होने का भले ही कितना भी दावा किया जा रहा हो, लेकिन स्थिति संतोषजनक नहीं है।

ब्लाक स्तर पर सीएचसी ही मरीजों के लिए बड़ा चिकित्सा केंद्र है, लेकिन मारहरा सीएचसी पर सिर्फ एक डाक्टर हैं। इस क्षेत्र में 80 हजार की आबादी है।

इमरजेंसी में किसी को मारहरा की सीएचसी पर लाया जाए तो डाक्टर नहीं मिलेंगे। एक आयुष चिकित्सक डा. उमाशंकर की तैनाती है। यहां चिकित्सा प्रभारी भी नहीं हैं। उनका तबादला हो चुका है। मिरहची स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डा. शोएब पर इसका चार्ज है। रविवार के दिन स्थिति और बदतर हो जाती है। ताला पड़ा रहता है और मरीज को कोई नहीं मिलता तो निराश होकर लौट जाते हैं। कोरोना पाजिटिव हो गया स्टाफ:

इस सीएचसी से जुड़े दर्जनभर कर्मचारी कोरोना काल में पाजिटिव हो गए। स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग करने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के कर्मचारी भी शामिल हैं। कर्मचारियों की कमी:

इस सीएचसी की व्यवस्थाएं कैसे दुरुस्त हों तथा यह अस्पताल कैसे पर्याप्त सेवाएं दे पाए, यह एक बड़ा सवाल है। यहां तीन वार्ड ब्वॉय, पांच स्टाफ नर्स, एक लैब टेक्नीशियन, एक फार्मासिस्ट की तैनाती है। दो फार्मासिस्ट जिला मुख्यालय पर बुला लिए गए हैं। एक फार्मासिस्ट दिनभर फील्ड में रहते हैं। ऐसे में अगर कोई मरीज स्वास्थ्य केंद्र पर आ जाए तो उसे देखने वाला कोई नहीं। कोविड अस्पताल में भेज दिए बेड:

सीएचसी पर आधा दर्जन से अधिक बेड थे जो चुरथरा कोविड अस्पताल एल-1 में भेज दिए गए। अब यहां बेड भी नहीं है। प्रतिदिन 20 लोगों के ही लग रही वैक्सीन:

मारहरा स्वास्थ्य केंद्र पर वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी है। अप्रैल में 50 से लेकर 60 तक लोगों के वैक्सीन लग रही थी, लेकिन इस समय यह आंकड़ा सिमटकर 15 से लेकर 20 तक रह गया है। वैक्सीनेशन के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन गति तेज नहीं हो पा रही। अगर यही स्थिति रही तो तो वैक्सीनेशन का लक्ष्य कैसे पूरा हो पाएगा। चार टीमें करतीं होम आइसोलेशन वालों की देखरेख:

यहां चार टीमों का गठन किया गया है जो होम आइसोलेट लोगों की देखरेख करती हैं। यह टीमें सुबह ही निकल जाती हैं। जो लोग पाजिटिव हैं, उनके घरों पर दस्तक देती हैं। एक भी आक्सीजन कंसंट्रेटर नहीं:

मारहरा स्वास्थ्य केंद्र पर एक भी आक्सीजन कंसंट्रेटर नहीं है। हाल ही में यह घोषणा की गई थी कि आक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि आक्सीजन की कमी न रहे, लेकिन कंसंट्रेटर अभी तक नहीं मिला। हालांकि तीन आक्सीजन सिलेंडर यहां उपलब्ध हैं। ब्लैक फंगस को लेकर कोई तैयारी नहीं: कोरोना संकट काल में ब्लैक फंगस की आशंकाएं भी यहां बनी हुईं हैं, लेकिन इस संबंध में कोई भी तैयारी इस स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाई नहीं देती। तैयारी हो भी कैसे यहां तो बेड तक नहीं हैं। अगर किसी को ब्लैक फंगस के प्रारंभिक लक्षण हों तो सीएचसी से तो निराश ही होना पड़ेगा। इस अस्पताल में सिर्फ सामान्य दवाएं ही उपलब्ध हैं। पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन तक नहीं हैं। मारहरा सीएचसी पर भले ही स्टाफ की कमी है, लेकिन जो भी संसाधन उपलब्ध हैं उनमें हम बेहतर तरीके से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। हमारी कोशिश है कि सभी मरीजों को सीएचसी पर अधिक से अधिक उपचार मिले।

- डा. शोएब, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी मारहरा

मारहरा सीएचसी पर पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं। स्टाफ की कमी है, लेकिन जितना भी स्टाफ उपलब्ध है वह ड्यूटी कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

- डा. उमेश चंद्र त्रिपाठी, मुख्य चिकित्साधिकारी एटा

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.