दो साल में भी नहीं लग पाए ट्रैफिक सिग्नल, विधायक निधि के 10 लाख वापस

दो साल में भी नहीं लग पाए ट्रैफिक सिग्नल, विधायक निधि के 10 लाख वापस

दो साल पहले शहर के चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगवाने के लिए की

JagranThu, 04 Mar 2021 03:48 AM (IST)

जागरण संवाददाता, एटा: दो साल पहले शहर के चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगवाने के लिए की गई पहल आज तक पूरी नहीं हो पाई। इस के लिए अनुदान भी मिला, लेकिन अब उसका कोई अता-पता नहीं कि पैसा कहां गया। जिम्मेदार पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।

शहर में ट्रैफिक सिग्नल की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही है। हाईवे पर ट्रैफिक अधिक रहता है। जिसके कारण चौराहों पर जाम की स्थिति बन जाती है। पुलिस को दिनभर कवायद करनी पड़ती है।

वर्ष 2018 में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड ने पहल की थी। उन्होंने विधायक निधि से 10 लाख रुपये पुलिस विभाग को दिये थे। इस धनराशि का सदुपयोग विभाग नहीं कर पाया। उस समय पुलिस विभाग ने लोक निर्माण विभाग को ट्रैफिक सिग्नल लगवाने का प्रस्ताव भेज दिया था। कुछ दिन बाद ही इस विभाग ने पुलिस को यह लिखकर दे दिया कि ट्रैफिक सिग्नल लगवाने का काम लोक निर्माण विभाग का नहीं है। यह विभाग सिर्फ सड़कों के रखरखाव और उनके निर्माण तक ही सीमित है। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वापस हो गयी निधि की धनराशि

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सदर विधायक द्वारा निधि देने का जो प्रस्ताव भेजा गया था, उसके तहत पैसा निकाला ही नहीं गया और निधि वापस हो गई। यानी कि साफ है कि जिम्मेदारों ने कोई पहल नहीं की। वर्ना यातायात व्यवस्था आज हाथों के इशारों पर नहीं नाच रही होती। यहां लगाए जाने थे सिग्नल

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शहर में ट्रैफिक सिग्नल के लिए तत्कालीन एएसपी संजय कुमार ने पांच स्थान चिन्हित कराए थे। इसमें रेलवे रोड चौराहा, गोदाम पुलिस चौकी, हाथी गेट, अलीगंज चुंगी और ओवरब्रिज शामिल थे। जब विधायक निधि से ट्रैफिक सिग्नल नहीं लगे तब दूसरी बार प्रस्ताव जिलाधिकारी से पास कराकर वर्ष 2019 में लखनऊ भेज दिया गया था। इसके पश्चात किसी ने पहल नहीं की।

10 लाख-ट्रैफिक सिग्नल की लागत

5-ट्रैफिक सिग्नल को चिन्हित स्थान

24-उपलब्ध ट्रैफिक पुलिसकर्मी

2-सिपाही

16-हेड कांस्टेबल

4-एचसीपी

1-एपीओ

1-टीएसआइ

- शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ट्रैफिक सिग्नल लगना बहुत जरूरी है। इसके लिए प्रभावी पहल करनी चाहिए।

अतुल राठी, नगर अध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल

- यातायात सिग्नल लगने से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में नयापन देखने को मिलेगा। इसके साथ ही यातायात पुलिस की परेशानी भी काफी कम हो जाएगी।

अमित चौहान, अध्यक्ष, मानव संस्कार सेवा समिति

- जब तक शहर में ट्रैफिक सिग्नल नहीं लगेंगे, तब तक जाम की समस्या से भी निजात नहीं मिल पाएगी। इसलिए इस मामले में तत्काल पहल की जाए।

राजेश गुप्ता, जिला महामंत्री, वैश्य एकता परिषद

- जाम लगने के कारण स्कूलों के बच्चे फंस जाते हैं। स्कूली वाहन देरी से पहुंचते हैं। ट्रैफिक सिग्नल होंगे तो इस समस्या से निजात मिल सकेगी।

राहुल गुप्ता, प्रबंधक, एमजी कान्वेंट

शहर में ट्रैफिक सिग्नल की आवश्यकता है। पुलिस विभाग इसके लिए प्रभावी पहल करेगा ताकि शहर की यातायात व्यवस्था में और सुधार हो सके।

सुनील कुमार सिंह, एसएसपी एटा

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यातायात व्यवस्था के लिए नासूर बने निजी वाहन स्टैंड

जागरण संवाददाता, एटा: शहर में प्राइवेट वाहनों के अनाधिकृत स्टैंड यातायात के लिए नासूर बन गए हैं। जाम की विकराल समस्या की बड़ी वजह ये निजी वाहन स्टैंड भी हैं। जो सड़कों व फुटपाथ पर कब्जा कर जिम्मेदारों को चुनौती दे रहे हैं।

जीटी रोड पर जनता दुर्गा मंदिर, रोडवेज बस स्टैंड, ठंडी सड़क तिराहा, कैलाशगंज मोड़, तहसील सदर, अलीगंज रोड तिराहा पर वाहन सड़क को घेरे खड़े रहते हैं। ठंडी सड़क, आगरा रोड, कासगंज रोड, अलीगंज रोड, निधौली कलां रोड आदि मार्गों पर भी विभिन्न जगह लगभग यही स्थिति रहती है। समस्या समाधान के लिए 2012 में जिला प्रशासन ने सभी प्राइवेट वाहन स्टैंड को शहर से बाहर स्थापित कराने का प्रस्ताव बनाया। कई बार जोर-शोर से तैयारियां भी की गईं, लेकिन नौ साल बाद भी अफसर इसे लागू नहीं करा सके।

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