सांसों की मजबूरियां फिर भी हरियाली से दूरियां

हर सांस के लिए आक्सीजन की जरूरत है फिर भी जनमानस पौधे लगाने से दूरि

JagranMon, 21 Jun 2021 03:33 AM (IST)
सांसों की मजबूरियां फिर भी हरियाली से दूरियां

जागरण संवाददाता, एटा: हर सांस के लिए आक्सीजन की जरूरत है फिर भी जनमानस पौधे लगाने से दूरियां बनाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर सर्वे में यह बात साफ हुई है कि 30 फीसद लोगों ने कभी एक पौधा नहीं लगाया। इससे भी ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिन्होंने पौधे तो लगाए, लेकिन उन्हें वृक्ष बनते नहीं देखा। ऐसी स्थिति से साफ है कि हरियाली बढ़ाने के मामले में लोगों की अरुचि सांसों के लिए परेशानियां बढ़ा रही है।

अभियान के तहत विभिन्न वर्गों के लोगों पर पौधारोपण करने की स्थिति परखी गई तो साफ हुआ कि एक बड़ा तबका है, जोकि पेड़ों से विभिन्न लाभ होने के बावजूद एक पौधा न लगा सका। 200 लोगों के सर्वे में सामने आया कि पौधे लगाने में विद्यार्थी तथा शिक्षक अग्रणी हैं। अधिवक्ता तथा प्रबुद्ध तबके के लोग भी पौधारोपण में रुचि लेते हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति पौधे लगाने के मामले में व्यापारी तथा व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की है। किसान भी हरियाली में सहायक है। वहीं महिलाओं में चाहे घरेलू पौधारोपण को लेकर जागरूकता हो, उनकी सहभागिता भी संतोषजनक है। सर्वे में 30 फीसद लोग ऐसे मिले जिनका कहना था कि उन्होंने कभी पौधा नहीं लगाया। 34 फीसद ने बताया कि पौधा लगाने के बाद उन्हें नहीं मालूम कि जीवित रहा या संरक्षण बिना अस्तित्व खो गया। उम्र के मामले में देखा जाए तो 7 से 20 वर्ष की आयु वर्ग में 50 फीसद से ज्यादा पौधे लगाने वाला सामने आये। सर्वे की खास बात यह रही कि शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ज्यादा पौधे लगाने में रुचि लेते हैं। नकदी के लिए पेड़ों पर चली आरी

----

सकीट निवासी वेदराम ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने पूर्वजों द्वारा लगाए 15 बीघा के बाग को बच्चों की शादी और अपनी बीमारी के निदान के लिए कटवा कर लकड़ी बेची। वहीं ग्राम दाऊदगंज अलीगंज के नवीशेर भी ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने पूर्वजों के खेतों पर लगाए गए दो दर्जन आम के पेड़ों को कटवाया नहीं, लेकिन हर साल उनसे 50000 की आमदनी हो जाती है। यह सब जानने के बाद भी कभी वृक्ष बनने के लिए पौधे लगाने का प्रयास नहीं किया। बेटी के जन्म लेते ही लगवाते थे 10 पौधे

------

गांव पवांस निवासी उदयवीर सिंह पुरानी यादें ताजा करते हुए बताते हैं कि उनके बाबा गांव में अपने या किसी परिचित के घर में कन्या जन्म लेते 10 आम, शीशम या अच्छा लाभ देने वाले पौधे लगवा देते थे। यह भी कहते थे कि बेटी की शादी में दिक्कत हो तो उनसे नकदी की जुगत कर लेना और उसी समय 20 पौधे और लगा देना। जहां पेड़ वहां नहीं रहती गरीबी

-------

ग्राम दहेलिया निवासी अखिलेश तिवारी बताते हैं कि गांव में उस समय के बुजुर्ग पेड़ों की रक्षा के लिए बच्चों को इकट्ठा कर पानी लगवाते थे और इसके बाद गुड़-चना खिलाते थे। सिखाते भी थे कि पेड़ों में भगवान होते हैं। इसलिए उन्हें पानी देना फर्ज सभी का है। जिस घर में पेड़ होता है, वहां गरीबी नहीं रहती।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.