बुखार से 94 मौत, सच पर स्वास्थ्य विभाग का पर्दा!

डेंगू से मर रहे लोग का रिकार्ड में शून्य मेडिकल कालेज में प्लेटलेट्स तक की व्यवस्था नहीं

JagranTue, 19 Oct 2021 04:59 AM (IST)
बुखार से 94 मौत, सच पर स्वास्थ्य विभाग का पर्दा!

जासं, एटा: बुखार से 94 लोगों की मौत जनपद में हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में एक भी मौत नहीं है। स्थिति यह है कि कम से कम 10 मौत तो मेडिकल कालेज में ही हो चुकी हैं। इनमें कुछ लोग वे भी शामिल हैं, जो मृत अवस्था में लाए गए। इमरजेंसी तक में इनका रिकार्ड नहीं है।

बुखार, डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का दावा कर रहा है। इन व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत अगर जाननी है तो शहर तो छोड़िए गांवों में चले जाइए।

कई गांव ऐसे हैं, जहां 8-10 मौतें तक अब तक हो चुकी हैं। राजा का रामपुर क्षेत्र का गांव बिल्सड़ पछायां और बिल्सड़ पट्टी में 10 लोग बुखार के चलते जान गवां चुके हैं। इनमें कुछ बच्चे भी शामिल हैं। सिरसाबदन में पांच मौत हो चुकी हैं। जलेसर का लोचा नाहरपुर, गढ़ी सलूका, बेरनी, जलेसर कस्बा, मारहरा कस्बा का मुहल्ला कायस्थान आदि ऐसे इलाके हैं, जहां बुखार ने दहशत पैदा कर दी है। घर-घर चारपाइयां बिछी हैं। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो कि बुखार से लोगों की मौत जनपद से बाहर हो रही हैं। इसलिए यहां रिकार्ड नहीं है। सच यह है कि लोग गांव में बीमार पड़ रहे हैं। प्राइवेट पैथोलॉजी पर जाकर डेंगू की जांच करा रहे हैं। सीबीसी रिपोर्ट में जब प्लेट्लेट्स अधिक डाउन होती हैं और एलाइजा टेस्ट में डेंगू की भी पुष्टि हो जाती है। मरीज को बेहतर उपचार मिले इसलिए लोग बाहर चले जाते हैं और स्वास्थ्य विभाग यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि विभाग की पैथोलॉजी में टेस्ट नहीं हुए। सवाल यह है कि बुखार या डेंगू पीड़ित अगर कोई व्यक्ति सरकारी चिकित्सालयों में इलाज नहीं करवा रहा तो क्या वह मरीज नहीं माना जाएगा। स्वास्थ्य विभाग यही कर रहा है। बाहर इलाज कराने वालों को वह रोगी नहीं मान रहा। शासन को किया जा रहा गुमराह

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शासन को भी गुमराह किया जा रहा है। सही रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही। मेडिकल कालेज में जो लोग आ रहे हैं, उन्हीं का रिकार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। उसमें भी डेंगू से कोई मौत नहीं दिखाई। विभाग के पास 100 लोगों में डेंगू की पुष्टि का आंकड़ा है। इनके टेस्ट मेडिकल कालेज में हुए हैं। शहर में छह प्राइवेट पैथोलॉजी पर डेंगू जांच की सुविधा है। औसतन एक पैथोलॉजी पर प्रतिदिन 8-10 मरीज डेंगू के निकल रहे हैं। पैथोलॉजी पर भीड़

बुखार का प्रकोप निरंतर बढ़ने से मेडिकल कालेज की दोनों पैथोलॉजी और प्राइवेट पैथोलॉजी पर मरीजों की भीड़ है। मेडिकल कालेज में आए दिन सीबीसी मशीन खराब होने के कारण जांच में व्यवधान आ रहा है। इसलिए लोग प्राइवेट पैथोलॉजी की ओर मुखातिब हो रहे हैं। मरीज को बाहर ले जाना मजबूरी

-यहां का मेडिकल कालेज भले ही शुरू हो चुका है, लेकिन डेंगू के मरीजों के लिए उचित उपचार की व्यवस्था नहीं है। अगर किसी की प्लेटलेट्स डाउन हैं और जम्बोपैक की आवश्यकता है तो यहां व्यवस्था नहीं हो पाती। कुछ प्राइवेट पैथोलॉजी आगरा, अलीगढ़ से व्यवस्था करती भी हैं तो अनाप शनाप कीमत मांगी जाती है। इसलिए लोग अपने मरीजों को बाहर ले जाते हैं।

जिन मौत के बारे में सूचना मिलती है, उनका डेथ आडिट कराया जाता है। अभी तक यही सामने आया है कि दूसरी बीमारियों के कारण मौत हुई हैं। इतना जरूर है कि एलाइजा टेस्ट के दौरान लोगों में डेंगू की पुष्टि हो रही है, लेकिन डेंगू से किसी मौत की सूचना स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।

डा. उमेश चंद्र त्रिपाठी, मुख्य चिकित्साधिकारी, एटा

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